मंगलवार, 7 अप्रैल 2009

जरनैल के जूते से गृह मंत्री सन्न

कुछ ही माह पूर्व इराक के पत्रकार मुंतदार अल जैदी ने अमेरिका के पूर्व प्रेसिडेंट जार्ज बुश पर जूते फेंककर विरोध जताया था। इस बात की चर्चा दुनिया भर के देशों में हुई। अधिकतर जगहों पर इस बात की आलोचना की गयी। यह बात अभी स्मरण से निकली भी नहीं थी कि नई दिल्ली में एक पत्रकार ने भारत के गृह मंत्री पी. चिदम्बरम पर जूते फेंक अपना विरोध जताया। श्री चिदम्बरम इसके लिए कतई तैयार नहीं थे। वे चंद मिनट के लिए सन्न रह गये। मामला कुछ यूं हुआ-7 अप्रैल को आतंकवाद से देश को बचाने के लिए नई दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसमें समाचार पत्र सहित कई टेलीविजन चैनलों के पत्रकार मौजूद थे। दैनिक जागरण अखबार के विशेष संवाददाता जरनैल सिंह भी मौजूद थे। वे सिख विरोधी दंगों में कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर को क्लीन चिट देने से आक्रोशित थे। मालूम हो कि 1984 के सिख दंगों में सैकड़ों सिख मारे गये थे। जरनैल सिंह इस संबंध में कई सवाल दागे, परंतु उन्हें चिदम्बरम से संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। इससे नाराज होकर उन्होंने भी मुंतदार अल जैदी वाला हथकंडा अपनाया। इस घटना के बाद थोड़ी देर के लिए भगदड़ मच गयी। जरनैल सिंह को हिरासत में ले लिया गया। पूरे देश में यह खबर जंगल में आग की तरह फैल गयी। भारत के भाजपा, सपा सहित अन्य पार्टियां अपनी-अपनी राजनीति शुरू कर दी। हालत बिगड़ते देख वित्तमंत्री ने पार्टी की संक्षिप्त बैठक कर तुरंत बयान जारी किया कि उन्होंने जरनैल सिंह को माफ कर दिया। उनपर कोई कार्रवाई नहीं होगी। जरनैल सिंह को आनन-फानन में छो़ड़ दिया गया। बाद में श्री सिंह ने भी अफसोस जताते हुए कहा कि उनका इरादा हीरो बनना नहीं बलि्क इस समस्या की तरफ सरकार का ध्यान खींचना था। हालांकि इस बात की अधिकतर पत्रकारों ने निंदा की है। सभी का कहना है कि पत्रकार के पास तो सबसे बड़ा हथियार कलम होता है। ऎसे में उन्हें इस तरह की ऒछी हरकत नहीं करनी चाहिए। इधर, दैनिक जागरण संस्थान ने न सिर्फ इस बात की आलोचना कि बलि्क जरनैल सिंह पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी कर रहा है।

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