बुधवार, 8 अप्रैल 2009

जांच घर ने स्वस्थ को बनाया रोगी

मुजफ्फरपुर के दो जांच घरों ने एक स्वस्थ बालक को अस्वस्थ बना दिया। रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक ने कहा कि बालक के खून में इंफेक्शन है, उसका एएसऒ (टीटर) 200 के बदले 600 हो गया है। उन्होंने बालक को ताजिंदगी हर माह में पेनीडोर इंफेक्शन लेने की सलाह दी। इतना ही नहीं उसे नमक, चीनी, ठंडा चीजें न खाने की सलाह दी। परिजनों को विश्वास नहीं हुआ, उनलोगों ने क्रास चेक कराया। दूसरी रिपोर्ट भी चिंताजनक थी। परिजन बालक को आनन-फानन में लेकर पटना भागे, वहां की जांच रिपोर्ट और चिकित्सक के अनुसार बालक पूरी तरह से स्वस्थ है, गैस के चलते उसके चेस्ट में दर्द हुआ था। मामला कुछ यूं है-मुजफ्फरपुर के रसूलपुर जिलानी का रहनेवाला एक परिवार के आठ वर्षीय बालक ईशान श्रीवास्तव के चेस्ट में हल्का दर्द हुआ। परिजन उसे स्थानीय चिकित्सक डा। सुमन कुमार के यहां ले गये। चिकित्सक ने ब्लड टेस्ट कराने के लिए लिखा। जांच रिपोर्ट के अनुसार ब्लड में जबरदस्त इंफेक्शन था। रिपोर्ट देखकर परिजनों के होश उड़ गये। उन्होंने अपने संतोष के लिए दुबारा ब्लड टेस्ट कराया, इसके पश्चात चिकित्सक के पास पहुंचे। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि दोबारा जांच की कोई जरूरत नहीं थी। चिकित्सक ने बालक को ताजिंदगी 21-21 दिनों पर पेनीडोर इंजेक्शन दिलवाने के लिए कहा। साथ ही गंभीर रोगी वाला भोजन देने की सलाह दी। चिकित्सक ने कहा कि इंजेक्शन न दिलवाने पर हार्ट का वल्ब व किडनी भी डैमेज हो सकता है। उनकी बात सुनकर परिजन नर्वस हो गये और पहला इंजेक्शन दिलवा दिये। इसी क्रम में सीतामढ़ी के डा. एम. ठाकुर से परिजनों ने बात की। उन्होंने रिपोर्ट के आधार पर इलाज को सही बताया। डा. राजीव आनंद से जब इस संबंध में बात हुई तो उन्होंने पटना में जाकर जांच की सलाह दी। परिजनों ने पटना में डा. एके. पांडेय से बालक को दिखाया। उन्होंने चेक करते ही कह दिया कि बालक को कोई बीमारी नहीं है। चेस्ट में दर्द गैस के चलते हो रहा है। परिजनों ने जब यह कहा कि मुजफ्फरपुर के दो पैथोलाजिकल लेबोरेटरी में ब्लड टेस्ट में इंफेक्शन निकला है तो चिकित्सक ने कहा कि वहां की जांच विधि काफी पुरानी है। उन्होंने कहा कि पूरे उत्तर बिहार से प्रतिदिन दर्जनों मरीज ऎसे आते हैं जो गलत जांच के चलते खुद को असाध्य रोग से ग्रसित मान लेते हैं। चिकित्सक ने परिजनों की मनोदशा को देखते हुए छाती का एक्सरे और कुछ ब्लड टेस्ट करवाने के लिए लिख दिया। बाद में सेन लैब में डिजिटल विधि से ब्लड टेस्ट हुआ, जिसमें सबकुछ नार्मल निकला। चौधरी डिजिटल इमेजिंग एंड रिसर्च सेन्टर में एक्सरे कराया गया। चिकित्सक ने जांच रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि बालक को कोई बीमारी नहीं है। उन्होंने बालक को कोई दवा नहीं लिखी। उनसे पूछने पर कि आखिर जांच रिपोर्ट में इतना अंतर कैसे? उन्होंने कहा कि आप भी वहां अपनी जांच करवा कर देखें, इसी रोग से ग्रसित हो जायेंगे।
जांच में भिन्नता इस प्रकार है-मुजफ्फरपुर : पोपुलर पैथोलाजिकल लेबोरेटरी एंड एक्सरे की जांच रिपोर्ट डब्लूबीसी काउंट : 11800
एएसऒ टीटर : 600
मुजफ्फरपुर : नवीन डाइग्नोसि्टक एंड रिसर्च लेबोरेटरीडब्लूबीसी काउंट : 10450 एएसऒ
टीटर : 400
पटना :
सेन लैब डाइग्नोसिस डब्लूबीसी काउंट : नार्मलएएसऒ टीटर : 147

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