गुरुवार, 9 अप्रैल 2009

राजनीति में सबकुछ जायज

कहते हैं कि राजनीति में सबकुछ जायज है। इतिहास के पन्ने भी इस बात के सबूत हैं। सत्ता सुख के लिए पिता ने पुत्र को तो बेटे ने पिता तक को नहीं छोड़ा। ऎसे समय जब लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, हर पार्टी अपने-अपने मुद्दे लेकर चुनावी मैदान में उतर चुकी है। कुछ ही दिन पहले उत्तरप्रदेश के पीलीभीत में भाजपा के वरुण गांधी ने उग्र भाषण दिये। यह किसी को खुश तो किसी को नाराज करने वाला भाषण था। एक नेता के तौर पर उनका भाषण पूरी तरह आपत्तिजनक था। हालांकि अगले दिन ही वरुण ने इस बात पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि सीडी से छेड़छाड़ कर भाषण के शब्द को उग्र बनाया गया है। तबतक यह आग पूरे भारत में फैल चुकी थी। शुरू में जब चुनाव आयोग ने इस बात पर वरुण को नोटिस जारी की तो भाजपा ने हाथ खींचते हुए कहा कि यह वरुण का अपना विचार है। इससे पार्टी को कोई लेना-देना नहीं है। देखते-देखते वरुण के खिलाफ इस मामले में मामला दर्ज कर दिया गया। बाद में वरुण पर रासुका भी लगा दिया गया जिससे उन्हें जेल जाना पड़ा। अब तक वरुण को इस मामले में जमानत नहीं मिल सकी है। बाद में भाजपा को यह अहसास हुआ कि यह तो बड़ा मुद्दा बन सकता है। तब भाजपा ने यह बयान जारी किया कि वह वरुण गांधी के साथ है। इसके पश्चात भाजपा के हर बड़े नेता ने अपने हरेक भाषण में वरुण गांधी की चर्चा अवश्य की। यूपीए सरकार में शामिल राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद ने तो वरुण के बारे में अपने भाषण में यहां तक कह दिया कि यदि वे गृह मंत्री होते तो वरुण के छाती पर बुल्डोजर चढ़वा देते। मीडिया में जब यह खबर आयी तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कानून का बुल्डोजर चढ़वाने की बात कही थी। आज राजनीति के खेल में हर नेता वरुण गांधी पर कुछ न कुछ अवश्य बयान दे रहा है। भाजपा के पास इस चुनाव में कोई बड़ा मुद्दा नहीं था क्योंकि राम मंदिर का मामला सुनते-सुनते लोग उब चुके थे। ऎसे में वरुण का भाषण उनके लिए एक मुद्दा से कम नहीं है। हालांकि वह इस बात को भाजपा खुलकर नहीं मान रही है। भाजपा के नेता अरुण जेटली का कहना है कि विपक्ष इसे मुद्दा बना रहा है। वरुण गांधी से मिलने उनकी चचेरी बहन प्रियंका गांधी जेल में गयी थीं। मीडिया में जब यह बात सामने आयी तो उन्होंने सफाई दी कि वे अपने भाई से मिलने गयी थीं। हालांकि उन्होंने वरुण को ठीक से गीता पढ़ने की सलाह भी दे डाली थी। यह तो तय है कि वरुण का मामला इतना से ही खत्म होनेवाला नहीं है। यदि वरुण को जमानत मिल भी जाती है तो भी भाजपा के लिए यह एक संजीवनी से कम नहीं है।

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