शुक्रवार, 10 अप्रैल 2009

बिहार की बेटी पर लखनऊ में जुल्म

बिहार के मुजफ्फरपुर की बेटी अनामिका पर उत्तरप्रदेश के लखनऊ में पिछले बारह साल से जुल्म हो रहा है। जुल्म की वजह है एक मां। मां का प्यार कभी-कभी इतना अंधा हो जाता है कि वह सही-गलत में निर्णय नहीं कर पाती है। यह सच्ची कहानी बादशाह नगर का रहनेवाला एक ऎसे परिवार की है, जहां मां ने ही अपनी बेटी का घर नहीं बसने दिया। शादी के बाद बेटी घर से विदा हुई, ससुराल में उसने चाहा कि उसका पति उसके वश में रहे। मां ने यही सिखला जो रखा था। शादी के बाद उसने जैसे-तैसे कुछ माह काटे। फिर मां ने उसे ससुराल नहीं रहने दिया। इस दौरान उसने एक बेटे को जन्म दिया। इसके पश्चात बेटी अपनी मां के साथ रहने लगी। उसके पति ने उसे मनाने की बहुत कोशिश की, मगर मां के वश में रह रही बेटी ने नहीं माना। इस घर के इकलौते बेटे मनीष की शादी 1996 में बिहार के मुजफ्फरपुर में हुई। यह शादी उसकी पसंद से हुई, देखते-देखते मनीष की पत्नी अनामिका ने दो बच्चियों को जन्म दिया। मनीष का ससुराल धनाढ़य नहीं था। मनीष से ज्यादा उसकी मां को यह चिंता सता रही थी कि बहू अपने मैके से मोटी रकम लेकर क्यों नहीं आयी ? इधर ससुराल छोड़ मैके में रह रही उसकी अपनी बेटी ने मां का कान फूंकना शुरू कर दिया। उसे दो साल बाद बहू खराब दिखने लगी। बहू की शिकायत वह हमेशा बेटे से करती थी। आजिज बेटे ने बहू को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू किया। बहू के परिवार वाले हाथ-पैर जोड़कर अपनी उन गलतियों के लिए माफी मांगते थे, जो उन्होंने नहीं किया था। इसी क्रम में बेटी के कहने पर सास ने बहू को अलग खाना बनाकर खाने को कहा। उसे अपने पति और बच्चों का खाना बनाने की इजाजत नहीं थी। इस जुल्म से अनामिका खोखली होती चली गयी। अनामिका के घर वालों को जब इस बात का पता चला तो वे उसे वर्ष 2001 में घर ले आये। वह मैके आकर रहने लगी। दो माह बाद ही उसे पता चला कि उसकी सास की तबीयत बिगड़ गयी है तो वह भागते हुए ससुराल चली गयी। दो-चार माह ठीक गुजरा। फिर जुल्म शुरू हो गया। जुल्म की हद तब और बढ़ गयी जब सास ने अनामिका को दोनों बेटियों से अलग कर मैके भिजवा दिया। हर साल तो कभी छह माह पर अनामिका को मैके भेज दिया जाता था। सारी परेशानी की वजह सिर्फ वह बेटी, बहन थी जो अपने पति से लड़कर मैके रह रही थी। 2009 में भी अनामिका मुजफ्फरपुर में अपने मैके में रह रही है। उसके पास न उसकी बेटियां हैं न ही पति। अनामिका अपने ससुराल वालों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई भी नहीं चाहती है। वह आज भी इस इंतजार में है कि उसका पति उसे लेने आये । देर से ही सही उसका पति लेने भी आयेगा। फिर कितना दिन बाद उसपर जुल्म होना शुरू होगा, यह कहना मुशि्कल है। हर तीस में एक घर अनामिका के ससुराल की तरह ही है। सास यह भूल जाती है कि कभी वह भी बहू थी। बेटी जब ससुराल छोड़ मैके में बस जाये तो उस घर की हालत नारकीय हो जाती है। अनामिका की जिंदगी कैसे कटेगी ? कब तक अनामिका प्रताड़ित होती रहेगी। यह सवाल समाज के हर व्यकि्त के लिए है जो इस तरह की हरकतों में शामिल है ?

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