बुधवार, 15 अप्रैल 2009

कड़वी हो गयी चीनी

यदि आप किसी ऎसे मित्र के यहां बैठे हैं जो बेरोजगार है या आर्थिक रूप से कमजोर है। तो, प्लीज चाय का इंतजार मत कीजिए क्योंकि हो सकता है कि वह आपको चाय न पिला सके। आप चाय के इंतजार में बैठे रहेंगे, वह दो मिनट; बस दो मिनट कहता रहेगा। परंतु चाय नहीं आयेगी। ऎसा नहीं है कि वह आपको चाय नहीं पिलाना चाहता है। बलि्क उसे अपनी मजबूरी के कारण ऎसा बयान देना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर आपके दूसरे मित्र के यहां भी कुछ इसी तरह की कहानी दुहरायी जायेगी। शायद आपने ध्यान से उस समाचार को नहीं पढ़ा है जिसमें चीनी के दाम में उछाल की बात कही गयी है। जी हां, अब हर घर की चाय कड़वी हो गयी है। बिहार में चीनी के दाम में एकाएक चार रुपये का उछाल आ गया है। जाहिर है कि देश के दूसरे प्रांतों में भी दाम बढ़ गये हैं। एक चाय ही तो है, जिसे गरीब शराब की तरह चुस्की लेकर पीत है। कोई कितना गरीब क्यों न हो, उसके यहां चाय की व्यवस्था जरूर रहती है। गरीब चाय पिलाकर ही अपने दोस्तों का स्वागत करते हैं। चाय दुकानदार यह समाचार सुनकर औधे मुंह गिरे हैं क्योंकि चीनी की कीमत बढ़ने के बाद भी उसे चाय की अधिक दर देने के लिए कोई तैयार नहीं है। हरेक ग्राहक से चायवाले की अनबन हो जा रही है। दुकानदार अब चौबीस के बदले अठाईस रुपये चीनी बेच रहे हैं। चीनी थोड़ा साफ है तो तीस रुपये बेचने में हिचक नहीं है। ऎसे में कमजोर तबके के घरों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। आमदनी वही है, खर्च बढ़ता जा रहा है। यह तकलीफ कोई किससे कहे? मंदी की मार से पहले ही कई कंपनियों ने इंक्रिमेंट देना बंद कर दिया है। हालांकि महंगी हो रही चीनी का असर कहीं चुनाव पर न पड़ जाये और मतदाता कहीं वोट देने में कंजूसी न कर दें। सरकार इस मुद्दे पर चौकस है। सितंबर तक 30 लाख टन कच्ची चीनी का आयात होने की संभावना है।

4 टिप्‍पणियां:

  1. क्या चीनी की बात है मँहगा सभी समान।
    इस चुनाव के दौर में केवल सस्ती जान।।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
    कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  2. मैं समझता था कि भारत में गन्ने की खेती बहुत होती है। लेकिन इसपर भी आयात करने की जरूरत कैसे पड़ गयी? मामला कुछ समझ में नहीं आया। वैसे गुड़ की चाय भी बन सकती है, कभी-कभार बना लिया करता हूँ - बहुत मजेदार होती है! पेट ऐसा भरता है कि साथ में कुछ खाने को भी नहीं चाहिये होता! :)

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  3. aam admi ke lie jina mushkil hota ja raha hai. ab to chai par bhi aafat hai.

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