सोमवार, 6 अप्रैल 2009

पूर्व मुख्यमंत्री के भाषण पर हो-हल्ला

राजद सुप्रीमो व रेलमंत्री लालू प्रसाद की परिपक्वता की तारीफ उनके दुश्मन भी करते हैं। बड़े-बड़े दिग्गज नेता मानते हैं कि जिस चतुराई से लालू ने रेलवे को घाटे से उबारा, वह कोई दूसरा नहीं कर सकता था। लालू ने हर साल रेलवे बजट को फायदे में ही दिखाया। इसके ठीक विपरीत उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी एक सीधी-साधी और घरेलू महिला हैं। पहली बार जब उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली तो वे पत्रकारों के सामने ठीक से बोल भी नहीं पाती थीं। लालू संग रहने के बावजूद राबड़ी देवी में बहुत बदलाव नहीं आया, वे परिपक्व लीडर की तरह कभी पेश नहीं आयीं। उनके बयान से विपक्ष क्या मतलब निकालेगा? इससे भी उन्हें कोई मतलब नहीं। पूरे भारत में जब चुनावी उत्सव अपने रंग में आ चुका है। राबड़ी देवी भी प्रचार के लिए निकल पड़ी हैं। इसी क्रम में उन्होंने छपरा के अमनौर प्रखंड के रायपुरा हाईस्कूल की चुनावी सभा में कहा कि ' जदयू प्रदेश अध्यक्ष ललन सिंह नीतीश कुमार का साला है, हम खुले आम बोलेंगे! और नीतीश कुमार ललन सिंह का साला है। दोनों में गोलावट है-गोलावट' इन लोगों ने कोर्ट व मीडिया को भी अपनी मुट्ठी में कर लिया है। इस भाषण के अंश को राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे हताशा में ऎसा बोल रही हैं। इसके पश्चात छपरा के भेल्दी थाने में राबड़ी देवी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी गयी। छह अप्रैल को राबड़ी देवी के खिलाफ हाईकोर्ट में भी याचिका दर्ज करायी गयी। जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने तो राबड़ी देवी को 'ताराबाई' की उपाधि दे डाली। इसे चुनाव आयोग ने भी गंभीरता से लिया और भाषण की सीडी देखने के तत्पश्चात कार्रवाई की बात कही। इस मुद्दे पर लालू फिलहाल चुप्प हैं। यह सही है कि राबड़ी देवी जब चुनाव क्षेत्र में प्रचार के लिए जा रही हैं तो उन्हें भाषा पर संयम रखना चाहिए था। बिहार का सत्ता पक्ष भी इस मुद्दे पर काफी टीका-टिप्पणी कर चुका है, कर रहा है। यह भी उचित नहीं है। यहां के मुख्यमंत्री ने तो काफी संयम बरता है, परंतु चीनी के घोल में चुपके से कुछ मिर्ची के पाउडर में डाले हैं। गए तीन दिनों से बिहार में राबड़ी के उक्त बयान की चर्चा चहुंऒर है। हर कोई अपने-अपने तरीके से इसे हवा दे रहा है।

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