सोमवार, 4 मई 2009

सबकी नजरें लालू, शत्रुघ्न पर


लोकसभा के चौथे चरण का चुनाव सात मई को होना है। बिहार में 37 सीटों पर चुनाव हो चुका है। सिर्फ तीन सीटों पर चुनाव होना बाकी है। परंतु इन सीटों पर सारे बिहारवासियों की नजरें टिकीं हैं। वजह है-इस दौर के चुनाव में राजद सुप्रीमो और रेल मंत्री लालू प्रसाद पाटलिपुत्र से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वहीं, अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा पटना साहिब से अपना भाग्य आजमा रहे हैं। इनके मुकाबले के लिए कांग्रेस ने टीवी स्टार शेखर सुमन को मैदान में उतार दिया है। तीसरी सीट नालंदा को इसीलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि क्योंकि यह बिहार के मुख्यमंत्री का गृह जिला है। सभी चुनावी भाषण में हर पार्टी अपनी जीत का दावा कर रही है। लालू प्रसाद का दावा है कि बिहार की सभी सीटों पर राजद-लोजपा के प्रत्याशी ही जीतेंगे। वहीं, जदयू-भाजपा गठबंधन का कहना है कि इस चुनाव में बिहार से राजद-लोजपा का सफाया तय है। वहीं, कांग्रेस ताल ठोक कर कह रही है कि चुनाव के परिणाम अप्रत्याशित होंगे। वामदल भी उक्त सभी पार्टियों के सफाये की बात कहता है। नेताऒं के बयान किसी हंसाने वाले चुटकुले से कम मजेदार नहीं है। क्योंकि चुनाव के परिणाम आते ही इनके रंग और बयान तुरंत बदल जाएंगे। कम सीट पाने वाले कहेंगे कि चुनाव में जबरदस्त धांधली बरती गयी है। यानी नेताऒ के पास गिरगिट की तरह रंग बदलने वाले कई जादुई नुस्खे हर पल मौजूद रहते हैं। एक नेता के साल भर के बयान का यदि निष्कर्ष निकाला जाए और उसे जनता के सामने परोसा जाए तो पढ़नेवाला व्यक्ति ही शर्म से पानी-पानी हो जाएगा। फिलहाल बिहारवासियों की नजरें लालू, शत्रुघ्न व शेखर सुमन पर टिकीं हैं। पाटलिपुत्र में राजद सुप्रीमो की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। लालू से दो-दो हाथ करने के लिए कभी उनका सहयोगी रहे कांग्रेस उम्मीदवार विजय सिंह और जदयू के रंजन यादव खड़े हैं। सर्वविदित है कि हार के डर से लालू हमेशा दो जगहों से चुनाव लड़ते हैं। वे सत्ता सुख के बिना एक पल भी नहीं रह सकते हैं, ऎसा उनके विरोधी व बिहारवासी भी मानते हैं। इधर, पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा भाजपा से और कांग्रेस से टीवी स्टार शेखर सुमन आमने-सामने हैं। कांग्रेस जानती है कि शेखर को कोई ईश्वरीय करिश्मा ही चुनाव जीता सकती है। इसके बावजूद वोट काटने और कांग्रेस का जनाधार बढ़ाने के लिए पार्टी ने ऎसा निर्णय लिया। उसी तरह नीतीश कुमार का गृह जिला नालंदा पर भी लोगों की खास नजर है। यहां से जदयू ने कौशलेन्द्र को मैदान में उतार दिया है। पिछले चुनाव में जदयू के टिकट पर यहां से रामस्वरूप प्रसाद जीते थे। रामस्वरूप इस बार कांग्रेस से ताल ठोंक रहे हैं।

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