मंगलवार, 5 मई 2009

...यमराज बनी बस


मां जानकी की जन्मस्थली सीतामढ़ी के लिए 5 मई (मंगलवार) अमंगल लेकर आया। अमंगल ऎसा जिसमें बाईस लोग करंट से असमय काल के गाल में समा गये। इनकी मौत इतनी भयानक थी कि शव देखने वालों की आंखें भी नम हो गयीं। बिना किसी रिश्ते-नाते के घटनास्थल पर पहुंचने वाले लोगों की आंखों से आंसू के बूंद टपक रहे थे। करंट से जले इन मृतकों में बच्चे, महिलाएं व बूढ़े भी शामिल थे। घर से चंदन-टीका कर और हंसते हुए वे सीतामढ़ी के पुपरी अनुमंडल से मुजफ्फरपुर आने के लिए सवार हुए थे। बस में 45 सीट थी। सभी पर यात्री थे। बस की छत पर भी कुछ लोग सवार थे। किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह यात्रा उनकी अंतिम है। यह भी नहीं सोचा होगा कि उनकी मौत इतनी भयानक होगी। बस तीन बचे पुपरी से खुली थी। कई बच्चे जिद कर खिड़की के किनारे बैठे थे। बाहर के सीन देख बच्चे कभी-कभी जोर-जोर से हंस भी पड़ते थे। महज आधा घंटा के सफर के बाद बस कोइली-शरीफपुर गांव के पास पहुंची। वहां 11 हजार वोल्ट का तार हवा में लटक रहा था। ड्राइवर ने सोचा कि वह साइड से बस को भगा लेगा। बस के अंदर बैठे सभी यात्री गपशप में मशगूल थे। इसी बीच एकाएक सारे यात्रियों के चीत्कार से इलाका दहल उठा। 11 हजार वोल्ट का तार बस में काल बनकर प्रवेश कर चुका था। छत पर बैठे कुछ यात्री को इतना तेज झटका लगा कि वे नीचे गिर पड़े। कुछ अन्य भी इसी आपाधापी में नीचे गिर पड़े। ये गंभीर रूप से चोटिल हो गये हैं। गेट के पास खड़े दो-तीन यात्री बाहर की ऒर कूद गये। जबतक ये संभलते तबतक एक साथ दर्जनों चीखें और चंद मिनट बाद पूरे बस में शव ही शव...इस सीन को देखने वाले की आंखें पथरा-सी गयी हैं। चीख इतना दर्दनाक था कि आसपास के गांव के सैकड़ों ग्रामीण तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गये। जब तक बिजली काटी गयी और अधिकारी पहुंचे। तबतक तो शव से गंध निकलने लगा था। किसी के पांव की जली हड्डी दीख रही थी। किसी का बुरी तरह झुलसा हाथ और चेहरा। बिहार सरकार के पास जब यह खबर पहुंची तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जांच का आदेश दे दिया। जिस वक्त यह घटना घटी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद, लोजपा के रामविलास पासवान व मुख्यमंत्री चुनावी सभा में मशगूल थे। तीनों बड़े नेताऒ में से किसी ने घटनास्थल पर पहुंचना मुनासिब नहीं समझा। बिजली विभाग ने मृतकों के परिजनों को एक-एक लाख देने की घोषणा कर अपने कर्तव्य से मुक्ति पा लिया। बिहार क्या भारत का इने-गिने ही ऎसे इलाके हैं जहां बिजली के तार कम लटके दिखेंगे। हर इलाके की घनी बस्ती से ट्रकें व बसें गुजरती हैं। इन इलाकों में भी तार झूलते रहते हैं। पूरे प्रदेश में रोज करंट की चपेट में आने से किसी न किसी की मौत हो जाती है। इसमें अधिकतर बिजली विभाग की लापरवाही से होता है। जर्जर लटकते तार आये दिन यमराज बन किसी न किसी का शिकार करते हैं। इसके बाद भी बिजली विभाग के साथ ही सरकार भी खामोश रहती है। सीतामढ़ी हादसे के वास्तविक दोषी को भी कोई सजा नहीं होने जा रही है। न ही सरकार इस घटना से चेतने जा रही है।

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