मंगलवार, 12 मई 2009

पीएम झुके, नीतीश को किया टेलीफोन

कोसी प्रलय के रुपये को लेकर कई दिनों से चल रहा आरोप-प्रत्यारोप पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार (12 मई) को विराम लगाने की भरपूर कोशिश की। प्रधानमंत्री ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को टेलीफोन कर इस मुद्दे पर बात की। इस बात की चर्चा राजनीति महकमे में जोरों पर है। कई राजनेता मानते हैं कि चार चरणों के चुनाव के कांग्रेस को महसूस होने लगा है कि सरकार बनाने के लिए उसे अन्य पार्टियों की मदद लेनी पड़ेगी। राजद-लोजपा पहले ही कांग्रेस को ठेंगा दिखा चुके हैं। इसी का परिणाम रहा कि कांग्रेस को बिहार में अकेले चुनाव लड़ना पड़ा। परिस्थिति को भांपकर ही पिछले हफ्ते राहुल गांधी ने नीतीश कुमार की तारीफ की थी। हालांकि नीतीश ने साफ-साफ कहा था कि एलके आडवाणी ही प्रधानमंत्री बनेंगे। मामला कुछ यूं है-रविवार को लुधियाना में आयोजित राजग की रैली में नीतीश ने केंद्र पर आरोप लगाया था कि बिहार में लोकसभा संपन्न होने के दस मिनट बाद ही केंद्र ने फैक्स भेजकर कोसी प्रलय से निबटने के लिए दिये गये 1000 करोड़ रुपये वापस मांग लिये। इसका जवाब प्रधानमंत्री ने लुधियाना में ही यह दिया कि बाढ़ राहत के रुपये बिहार सरकार के पास महीनों पड़े रहे। यहां की सरकार राशि खर्च ही नहीं कर सकी। मनमोहन सिंह ने यह भी कहा था कि नीतीश झूठे हैं। इस पर पुनः नीतीश ने आक्रोश और आश्चर्य जताते हुए कहा था कि रुपये खर्च कर दिये गये हैं। कोसी मुद्दे पर उठते विवाद को देख 12 मई को प्रधानमंत्री ने 'यूटर्न' ले लिया। उन्होंने झुकते हुए नीतीश को टेलीफोन किया और इस मामले में बात की। उन्होंने नीतीश को आश्वासन दिलाया कि कोसी मसले पर विचार किया जाएगा। इस मामले में नीतीश ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस मसले पर शीघ्र ही निर्णय लेना चाहिए। वहीं राजनीति के जानकारों का कहना है कि कांग्रेस चाहती है कि नीतीश को वह अपने में मिला ले ताकि सत्ता के जादुई आंकड़े को वह आसानी से पार कर सके। पिछले ही सप्ताह बिहार के प्रदेश अध्यक्ष ने भी नीतीश की प्रशंसा की थी। इतना तो तय है कि किसी भी पार्टी को इस चुनाव में पूर्ण बहुमत नहीं मिलने जा रहा है। ऎसे में गठजोड़ की राजनीति अभी से शुरू हो गयी है।

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