गुरुवार, 14 मई 2009

मायावती को सुप्रीम कोर्ट का तमाचा

वरुण गांधी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के लिए जोरदार तमाचे से कम नहीं है। यह तमाचा उन सभी नेताऒ के गाल पर भी जो कानून की ताकत को कम करके आंकते हैं। सुप्रीम कोर्ट कई बार ऍसे फैसले सुनाता है जिससे भारतवासियों का विश्वास कानून के प्रति बढ़ जाता है। वरुण मामला भी कुछ इसी तरह का है। सुप्रीम कोर्ट ने 14 मई को उत्तरप्रदेश की सरकार को वरुण पर से रासुका हटाने का आदेश दिया है। भाजपा के उम्मीदवार वरुण गांधी ने पीलीभीत में भड़काउ भाषण दिये थे। यह भाषण सांप्रदायिकता को भड़काने वाला था। इस भाषण के बाद नेताऒ ने वोट के लिए राजनीति करनी शुरू कर दी। हर कोई वरुण के भाषण को मुद्दा बनाना चाहता था। शुरू के दौर में भाजपा ने बयान दिया कि वरुण के भाषण से पार्टी का कोई लेना देना नहीं है। बाद में उत्तरप्रदेश की सरकार ने वरुण पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून [रासुका] लगा दिया। रासुका लगते ही वरुण को जेल जाना पड़ा। इसके बाद भाजपा को अहसास हुआ कि इसे चुनावी मुद्दा बनाया जा सकता है। तब भाजपा के राजनाथ सिंह ने जगह-जगह घूमकर भाषण देना शुरू किया कि वरुण के साथ ज्यादती हुई है। यूपीए सरकार में शामिल राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद ने तो वरुण के बारे में अपने भाषण में यहां तक कह दिया कि यदि वे गृह मंत्री होते तो वरुण के छाती पर बुल्डोजर चढ़वा देते। मीडिया में जब यह खबर आयी तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कानून का बुल्डोजर चढ़वाने की बात कही थी। वरुण के बारे में राजनीति के जानकारों का कहना है कि वरुण ने जानबूझकर भड़काउ भाषण दिये ताकि राजनीति में अपना स्थान बना सकें। वहीं एक पक्ष का कहना है कि वरुण राजनीति में अभी कच्चे हैं। रासुका हटाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से वरुण को काफी राहत मिली है। वहीं बसपा को झटका लगा है। कांग्रेस के प्रवक्ता राजीव शुक्ला ने युवा भाजपा नेता और बसपा सरकार पर वोट बैंक की राजनीति में लिप्त होने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि यह प्रकरण वरुण को मदद नहीं करेगा क्योंकि भाजपा नेतृत्व आखिरकार उन्हें किनारे कर देगा। कांग्रेसी नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा कि युवा नेता भाजपा के लिए लाभदायक होने के बजाय 'भार' अधिक हैं।

1 टिप्पणी:

  1. भई रविकांत जी, इस प्रकार के तमाचों के तो ये लोग अभ्यस्त हो चुके हैं.

    उत्तर देंहटाएं