शुक्रवार, 15 मई 2009

नीतीश ने बदले सुर, भाजपा को झटका

कहते हैं राजनीति में सबकुछ जायज है। अपने फायदे के लिए नेता कभी भी अपना सुर बदल सकते हैं। ये कब कौन-सा रंग अपनाएंगे कहना मुश्किल है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 15 मई को पटना में कहा कि वे उसी पार्टी को अपना समर्थन देंगे जो बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देगा। उनके इस बयान से भाजपा को जोरदार झटका लगा है क्योंकि अबतक नीतीश कुमार एलके आडवाणी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए समर्थन देने की बात करते रहे हैं। अभी तक के चुनावी आंकड़े से लगता है कि कांग्रेस सांठगांठ कर सरकार बनाने में कामयाब हो जाएगी। यदि कुछ सीटें कम पड़ रही हो तो भी नीतीश के समर्थन से जादुई आंकड़ा 272 को छूने में कांग्रेस कामयाब हो जाएगी। यदि नीतीश कांग्रेस को अपना समर्थन देते हैं तो बिहार में उनकी सरकार गिर सकती है क्योंकि तब भाजपा अपना समर्थन वापस ले सकती है। यह भी हो सकता है कि नीतीश ने अंधेरे में पांसा फेंका हो। यह भी संभव है कि भाजपा के खिलाफ तीसरे मोर्चे को समर्थन दे दें। हालांकि इसका अंदेशा कम है। नीतीश वोट को अपने पाले में करने के लिए कांग्रेस कई बार पांसा फेंक चुका है। यह सत्ता का ही खेल है कि लोकसभा चुनाव के दो सप्ताह पहले तक राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान एक-दूसरे के खिलाफ बयान देते रहे हैं। फौरन चुनाव में गठबंधन के बाद एक-दूसरे को भाई कहने लगे। कहने लगे कि दोनों भाई मिलकर विकास करेंगे। उनके इस मिलाप पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीखी टिप्पणी की थी। यह भी कहा था कि चुनाव बाद और केन्द्र में सरकार बनते ही दोनों एक-दूसरे के खिलाफ फिर से बयान देना शुरू कर देंगे। नीतीश ने यह भी कहा था कि दोनों मनचाही कुर्सी के लिए केन्द्र पर दबाव बनाने के लिए ऍसा कर रहे हैं। 30 मई को तीसरे चरण के चुनाव के बाद कांग्रेस को महसूस होने लगा कि बिना त्रीय पार्टियों की मदद से सरकार बनाना संभव नहीं होगा। ऍसे में स्वच्छ छवि के नेता माने जाने वाले नीतीश कुमार पर कांग्रेस की नजर गयी। कांग्रेस के राहुल गांधी ने एक चुनावी सभा में नीतीश कुमार की प्रशंसा कर दी। उन्होंने बिहार में हो रहे विकास की भी तारीफ की। इससे साफ हो गया कि कांग्रेस नीतीश वोट को अपने पाले में करना चाहती है। तब नीतीश ने कड़ा बयान जारी कर कहा कि वे एलके आडवाणी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए समर्थन करेंगे। 13 मई को पांचवें चरण का चुनाव समाप्त हो गया और सभी पार्टियों को यह अंदाजा हो गया कि उन्हें कितने वोट मिलेंगे। इसके साथ ही शुरू हो गया सांठगांठ का दौर। तीन दिन ही पहले कोसी विवाद को लेकर प्रधानमंत्री ने नीतीश कुमार को टेलीफोन कर बात की थी। इससे साफ होने लगा था कि नीतीश कुमार अपना समर्थन कांग्रेस को दे सकते हैं।

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