मंगलवार, 19 मई 2009

लालू के विरोध में उठने लगे स्वर

रेल मंत्री के पद से हटते ही लालू प्रसाद के खिलाफ एक साथ कई तरफ विरोध के स्वर गूंजने लगे हैं। चुनाव में करारी हार के बाद लालू को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं करने की आवाज भी तेज हो गयी है। बिहार में एकजुट कांग्रेसजन का कहना है कि लालू के चलते पार्टी को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। ऍसे में इन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने का कोई औचित्व नहीं है। लालू के विरोध में पटना में कांग्रेसियों ने जमकर प्रदर्शन किया। वहीं, केन्द्रीय मंत्रिमंडल का इस्तीफा होते ही 19 मई को लालू के पटना स्थित आवास से आरपीएफ का कैंप उखड़ गया। रेलवे ने आवास के भीतर चल रहे कैम्प कार्यालय को भी समेटना की कवायद शुरू कर दी है। इससे लालू प्रसाद के आवास पर हड़कंप मंच गया। उनके आवास पर कोई चार दर्जन जवान तैनात किये गये थे। देखते ही देखते यह बात वरीय अधिकारियों तक पहुंच गयी। बात बढ़ते देख वरीय आरपीएफ अधिकारी ने दो दर्जन जवानों को पुनः आवास पर भेज दिया। साथ ही अपना बयान भी बदल दिया। कहा कि-फटे तंबू बदलने के लिए जवानों को हटाया गया था। रेलवे के एक अधिकारी ने दबी जबां में कहा कि रेल मंत्रालय से आदेश आने के बाद ही अब जवानों को हटाया जाएगा। सूत्र बताते हैं कि लालू प्रसाद इस बार बिना शर्त यूपीए को समर्थन देने को राजी हैं। दूसरे शब्दों में मिन्नतें कर रहे हैं कि किसी तरह यूपीए राजद को भी शामिल कर ले। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि लालू प्रसाद जी तोड़ कोशिश में लगे हुए हैं कि किसी तरह उन्हें कोई मंत्री का पद मिल जाए। हालांकि कहीं से भी इसकी संभावना नजर नहीं आ रही है। कांग्रेस में कई बड़े नेताऒं ने भी खुलकर कहा है कि लालू को दरकिनार कर चलना चाहिए। परंतु राजद के ही पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह को कांग्रेस लोकसभा का अध्यक्ष बनाना चाहती है। राहुल गांधी को रघुवंश प्रसाद का काम काफी पसंद आया था। हालांकि इस पर अभी पूर्ण रूप से सहमति नहीं बनी है। लालू समय के अनुसार रंग बदलने में माहिर नेता हैं। ऍसे में वे खुद के लिए 'जुगार' लगाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि पांच वर्ष तक उन्हें सत्ता सुख से अलग न रहना पड़े। यह भी सच है कि ऍसा पहली बार देखा जा रहा है कि लालू के विरोध में एक साथ कई आवाजें मुखर होने लगी हैं। इससे पहले वे जोड़-तोड़ की राजनीति कर हर आवाज को दबाते रहे हैं।

3 टिप्‍पणियां:

  1. लालू पर व्यन्ग पढें .
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  2. कभी-कभी अनजाने में कही हुई बात सच हो जाती है। प्रणव मुखर्जीजी ने कहा था- लालूजी अगली बार मंत्रिमंडल में नहीं रहेंगे।

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