बुधवार, 20 मई 2009

बिना सत्ता कैसे रहेंगे रामविलास पासवान!

लोकसभा चुनाव में रामविलास पासवान ने राजद सुप्रीमो से हाथ क्या मिलाया कि लोजपा का सूपड़ा ही साफ हो गया। चुनाव के दो माह पहले लालू-पासवान पुरानी बात भुलाकर भाई बन चुके थे। 'भाई' बनना कितना घातक हुआ, इस बात को पासवान बखूबी समझ रहे हैं। पासवान देश के उन चंद नेता में शामिल हैं जो बिना सत्ता सुख के नहीं रह सकते हैं। यही कारण है कि जिस पार्टी की सरकार बनती है वे उसमें शामिल हो जाते हैं। ये वाजपेयी की सरकार में भी शामिल हो चुके हैं। पिछले चुनाव में लोजपा को बिहार में चार सीटें मिली थीं। पासवान ने कांग्रेस को समर्थन दिया था, बदले में इन्हें केन्द्रीय मंत्री की कुर्सी मिली थी। इस चुनाव में उनका सूपड़ा साफ हो चुका है। वे शून्य पर आउट हो चुके हैं। अब ये कैसे मंत्री बनेंगे? यह एक ज्वलंत सवाल है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि फिलहाल ये राज्यसभा सांसद बनकर कोई न कोई मंत्री पद जरूर पा लेंगे। हालांकि कांग्रेस किसी भी कीमत पर इन्हें घास डालने को तैयार नहीं है। पासवान कई दूसरी पार्टियों से भी संपर्क में हैं, जो सत्ता सुख पाने में इनकी मदद करे। यदि सारी 'जुगाड़ व्यवस्था' ' फेल हो जाती है तब पासवान क्या करेंगे? सत्ता इनके लिये भोजन से कम जरूरी नहीं है। इस चुनाव में एक और आश्चर्यजनक बात सामने आयी कि खुद को दलितों का मसीहा कहने वाले रामविलास को दलितों ने भी पूरी तरह से नकार दिया। लालू से हाथ मिलाने की बात अब ये सदैव याद रखेंगे। चुनाव के ठीक पहले लालू-पासवान ने आपस में गठबंधन कर बिहार के 40 में से 37 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। कांग्रेस के पाले में गयी थीं सिर्फ तीन सीटें। इससे भड़की कांग्रेस ने बिहार की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। चुनाव के ठीक पहले लालू-पासवान का एक होना जनता को नहीं भाया। जनता ने दोनों नेताऒं के खिलाफ अपने मताधिकार का प्रयोग किया जिससे लोजपा का सूपड़ा ही साफ हो गया। राजद के रघुवंश प्रसाद सिंह भी मानते हैं कि चुनाव के पहले दोनों नेताऒं का मिलन जनता को रास नहीं आया। पासवान को अब खोया जनाधार पाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। बिहार में सोलह माह बाद विधानसभा का चुनाव होना है। यह चुनाव भी उनके लिये काफी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल यह देखना है कि पासवान अपनी 'जुगाड़ व्यवस्था' में फेल होते हैं या पास।

1 टिप्पणी:

  1. aap paswan ji ki chinta mat karen, wo bahut tez aadmi hain.aap aur mere jaise log nahi samajh payenge un jaise logon ka khel.

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