गुरुवार, 21 मई 2009

मंत्री नहीं बनेंगे लालू प्रसाद!

प्रधानमंत्री बनने का दावा करने वाले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद क्या इस बार मंत्री भी बन पायेंगे? कांग्रेस उनके सामने घास डालने के लिए भी तैयार नहीं है। लालू विनती भरे स्वर में यूपीए को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा कर चुके हैं। इसके बावजूद यूपीए की महत्वपूर्ण बैठकों में उन्हें आमंत्रित नहीं किया जा रहा है। लालू चारा घोटाले के आरोपी हैं। उन्हें इस बात का भय सता रहा है कि कहीं उनके खिलाफ सीबीआई ने टेढ़ा रुख अपनाया तो उन्हें फिर से जेल की हवा खानी पड़ेगी। चारा घोटाले में जब वे पिछली बार जेल गये थे तो बिहार में उनकी पत्नी राबड़ी देवी मुख्यमंत्री थीं। इस वजह से जेल में उन्हें किसी तरह की असुविधा नहीं हुई थी। उन्हें यह भी महसूस नहीं हुआ था कि वे जेल में हैं। परंतु इस बार बिहार में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं, वे भी उनके खिलाफ अवसर ढूंढ़ रहे हैं। लालू एक दूरदर्शी व्यक्ति हैं, उन्हें इस बात का अंदाजा है। तभी वे यूपीए को हर हाल में समर्थन देना चाहते हैं ताकि सीबीआई के प्रहार से वे बच सकें। लालू मंत्रिमंडल में शामिल न हों, इसके लिये कई कांग्रेसी नेता विरोध कर रहे हैं। पिछले चुनाव में लालू के पाले में 22 सीटें आयी थीं। इस बार राजद को सिर्फ चार सीटें मिलीं। ऍसे में लालू यूपीए से 'बार्गेन' की स्थिति में नहीं हैं। 16 मई को मतगणना शुरू होने के तीन घंटे बाद ही लालू का चेहरा सफेद पड़ गया था। वे ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे। पूरा रिजल्ट आने के बाद भी उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि उनकी पराजय हो चुकी है। इस बार यूपीए लालू के सामने चारा डालने के लिए तैयार नहीं है। सिंह की तरह दहाड़ने वाले लालू की आवाज धीमी पड़ चुकी है। वे हार मान चुके हैं। यह भी महसूस कर चुके हैं कि यदि वे बिहार में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़े होते तो उन्हें इतना अधिक नुकसान नहीं होता। लालू को कहीं से कोई उम्मीद की किरण नजर नहीं आ रही है कि इस बार उन्हें मंत्री की कुर्सी मिलेगी। सत्ता सुख पाने को बेचैन लालू हर तरफ हाथ-पांव मार रहे हैं कि चार सांसदों के समर्थन के बदले उन्हें मंत्री की कुर्सी मिल जाए। कांग्रेस में कई मंत्री उनके हितैषी भी हैं। ऍसे में मुमकिन है कि थोड़ी झिड़की के बाद कांग्रेस उन्हें कोई पद दे दे। राजनीति में सबकुछ संभव है, ऍसे में शायद लालू की मिन्नतें काम आ जाए। चुनाव के पहले कांग्रेस के खिलाफ बयान देनेवाले लालू ने आज चुप्पी साध ली है। लालू का कहना है कि जनता ने उन्हें नकारा है। वे जनता के दरबार में फिर जाएंगे। अपनी भूल को सुधारेंगे और फिर जीतेंगे। उनके पुराने दिन फिर लौटेंगे। परंतु इसके लिये लालू को पांच साल इंतजार करना होगा।

2 टिप्‍पणियां:

  1. अब बहुत हुआ ..
    लल्लूबाज़ी के दिन लद गए..
    दो दशक तक खूब मज़े उड़ा लिए..जाओ भी...
    लालटेन में बल्ब लगा कर आओ..

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