शुक्रवार, 22 मई 2009

बचिए चाटुकारों से

आप चाहे जिस माहौल में रहते हैं। बुद्धिजीवियों के बीच या गंवारों के बीच, गांव में या शहर में, दफ्तर में या घर में, दोस्तों के बीच या गैरों के बीच दिनभर में कई ऍसे व्यक्ति मिल जाएंगे जो चाटुकारिता कर आपसे अपना मतलब निकाल लेंगे। आप जबतक इस बात को समझेंगे तबतक ठगे जा चुके होंगे। ट्रेन में आप सफर कर रहे हैं, कई लोग अपने बातचीत से आपका ध्यान खींचने की कोशिश करते हैं। इस तरफ ज्यों ही आपका ध्यान जाता है और आप उसकी बातों में रुचि लेने लगते हैं। वह आपकी चाटुकारिता कर आपके नजदीक आने की कोशिश करता है। थोड़ी ही देर में वह आपको सिगरेट या फिर चाय या बिस्कुट के लिए आमंत्रित करता है। जैसे ही आप उसका साथ देते हैं, थोड़ी ही देर में आप नशे में झूमने लगते हैं। होश आने पर पता चलता है कि चाटुकारिता करते-करते उक्त व्यक्ति आपको चूना लगा फरार हो चुका है। आप लुट चुके हैं। व्यक्ति की सबसे बड़ी कमजोरी होती है कि वह अपनी प्रशंसा सुनना चाहता है। वह यह सुनने के लिए कतई तैयार नहीं होता कि उसमें बहुत सारी कमियां हैं। उसके मित्र या खुद उसके घरवाले भी यदि उसे समझाते हैं कि 'तुम अपनी कमी को सुधारो, वह भड़क जाता है।' बाहर की छोड़िए घर में भी कई बार बच्चे अपने अभिभावक की चाटुकारिता करने से नहीं चूकते हैं। बच्चे ऍसा तब करते हैं जब उन्हें अभिभावक से किसी काम के लिए पैसे लेने हों या फिर दोस्तों के साथ कहीं घूमने का प्रोग्राम बना हो। कई बार अभिभावक जान-बूझकर बच्चों के सामने झुक जाते हैं वहीं कई बार अभिभावक बच्चों की बात सुन इतने आनंदित हो जाते हैं कि उन्हें इस बात का अहसास तक नहीं होता कि बच्चे अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। ठीक इसके विपरीत कभी-कभार अभिभावक भी बच्चों की चाटुकारिता कर अपना काम निकाल लेते हैं। परंतु घर की चाटुकारिता घातक नहीं होती। इसमें प्रेम का मिश्रण होता है। विभिन्न दफ्तरों में इस तरह की चाटुकारिता खूब देखने को मिलती है। बास की चाटुकारिता करने वालों को फायदा होता है। कई बार ऍसा भी होता है कि बास सही-गलत का फर्क नहीं कर पाते और चाटुकार के इर्द-गिर्द ही घूमते रहते हैं। इसका नुकसान दफ्तर के दूसरे साथियों को उठाना पड़ता है। कुछ साल पहले की बात है एक बार मेरे बास ने टेलीफोन पर आदेश दिया कि आप (काल्पनिक नाम) राजेश को तुरंत हटा दें। मैंने कहा कि आप उसे थोड़े दिन के लिए सस्पेंड कर दें परंतु उसे हटायें नहीं। बास ने कहा कि 'मेरे बाल पक गये हैं, तुम मुझे सिखाऒगे।' मैंने राजेश को नहीं हटाया। परंतु बास के अनुरूप सुधरने की हिदायत दी। थोड़ी नाराजगी के बाद बास मान भी गये। उन्हें लगा कि मैं सही कह रहा हूं। इसी क्रम में एक चाटुकार ने चाटुकारिता शुरू कर दी। उसने कहा कि 'बास यह तो आपके आदेश का उल्लंघन है।' उसका चाटुकारिता रंग लाया। बास ने राजेश को फिर हटाने के लिए कहा। राजेश के बिना दफ्तर का काम बाधित होता था। इसलिए मैं उसे हटाना नहीं चाहता था। हालांकि बाद में बास के दबाव में मुझे उसे हटाना पड़ा। पुन: कुछ ही दिन बाद बास ने फिर उसे रखने के लिए कहा। वजह थी कि दूसरे बड़े चाटुकार ने राजेश को रखने के लिए चाटुकारिता की। मैं काम पर विश्वास करता था। मुझे ये महसूस होता था कि यदि मेरा काम बेहतर होगा तो दफ्तर इसे पसंद करेगा। मैं यहां गलत था, अधिकतर दफ्तरों में काम बाद में चाटुकारिता पहले पसंद किया जाता है। मेरे चाटुकारिता न करने का परिणाम हुआ कि मुझे दो साल इन्क्रीमेंट नहीं मिला। एक बार प्रोमोशन से भी वंचित रहना पड़ा। अंतत: मुझे उस संस्थान को छोड़ना पड़ा। मीडिया में काम करने वाले एक मित्र से मैंने पूछा कि यार तुम कैसे बास की चाटुकारिता करते हो। उसने बताया कि वह बास ही नहीं; अन्य कई साथियों की भी चाटुकारिता करता है। उसने बताया कि यदि किसी जूनियर या सीनियर रिपोर्टर की वह कापी चेक करता है। गलतियां मिलने पर उक्त रिपोर्टर को बुलाकर कहता है कि इसमें काफी गलतियां हैं। इसे फिर से लिखकर लाएं तो वह रिपोर्टर अपनी भूल मानने के बदले गोलबंदी शुरू कर देता है। ऍसे में उससे यही कहना बेहतर है कि यार तुम्हारी कापी का तो कोई जवाब ही नहीं। उक्त रिपोर्टर जो गलती पन्द्रह साल पहले करता था। अब भी वही गलती करता है, वह खुद को सबसे सीनियर समझता है। इस तरह जूनियर रिपोर्टर से कम भी जानने वाले चाटुकारिता की बदौलत आज ऍसी कुर्सी पर विराजमान हैं जहां उन्हें नहीं होना चाहिए। चाटुकारिता करनेवाले लोगों से हमेशा सावधान ही रहना चाहिए। ये बिना मतलब कभी आपकी चाटुकारिता नहीं करनेवाले हैं। यह भी सही है कि इनकी चाटुकारिता से बड़े-बड़े लोग प्रभावित हो जाते हैं। फिर ये चाटुकार मतलब के लिए उनका शिकार करते हैं।

3 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा है मगर इनसे घिरे रहने का लोभ संवरण करना भी एक प्रकार का साधुत्व प्राप्त करने जैसा ही है. :)

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