गुरुवार, 28 मई 2009

अमेरिका के गाल पर उत्तर कोरिया का तमाचा

पूरा विश्व अमेरिका की तानाशाही से अवगत है। कमजोर देश हमेशा इस बात से भयभीत रहते हैं कि कहीं अमेरिका आर्थिक मदद देना बंद न कर दे। इन सारी बातों को जानते-समझते हुए भी उत्तर कोरिया ने परमाणु परीक्षण कर एक तरह से अमेरिका को खुलेआम चुनौती दे डाली है। अमेरिका के अलावा परमाणु संपन्न हर देश ने उत्तर कोरिया के इस परीक्षण की आलोचना की है। परमाणु संपन्न सभी देश यह जानते हैं कि यदि परमाणु युद्द शुरू हुआ तो पृथ्वी पर कोई नहीं बचेगा। आज अकेले अमेरिका के पास ही इतनी परमाणु शक्ति है कि वह पूरे संसार को कई बार नेस्तनाबूद कर सकता है। इसके पश्चात रूस की ताकत को भी कम करके नहीं आंका जा सकता है। अमेरिका ने 6 अगस्त 1945 में जापान के हिरोशिमा शहर पर यूरेनियम-23 से बने 12.5 किलोटन वाले परमाणु बम गिराया था। जिससे अस्सी हजार लोग मारे और चालीस हजार से अधिक घायल हो गये थे। पूरा हिरोशिमा शहर तबाह हो गया था। आज भी हिरोशिमा में जन्म लेने वाले कई बच्चे सामान्य नहीं होते। इस घटना की तबाही को पूरी दुनिया ने महसूस किया। इसके बावजूद परमाणु शक्ति हासिल करने की होड़ शुरू हो गयी। कुछ ही साल में कई देश परमाणु संपन्न हो गये। बाद में अमेरिका-रूस सहित कई देशों ने महसूस किया कि यदि छोटे-छोटे देश भी इस शक्ति को हासिल कर लेते हैं। और कहीं इसका गलत इस्तेमाल कर देते हैं तो पृथ्वी का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। जिस विकास की दौड़ में हम रह रहे हैं, उससे काफी पीछे जाना पड़ेगा। यदि भूल से भी बड़े देश इसका इस्तेमाल कर देते हैं तो संसार ही मिट जाएगा। पूरा विश्व समुदाय इस पर चिंतन कर रहा है कि वैसे देश जो परमाणु संपन्न नहीं हैं, उन्हें कैसे रोका जाए। इसके लिये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई कानून बने हैं। सारे नियम को ताक पर रख उत्तर कोरिया ने परमाणु परीक्षण कर विश्व समुदाय के मुंह पर करार तमाचा जड़ा है। उत्तर कोरिया ने पहला परमाणु परीक्षण 9, अक्टूबर 2006 को किया था। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उसके परमाणु कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया था। परमाणु संपन्न बड़े देशों ने परमाणु कार्यक्रमों को रोकने के बदले ऊर्जा सहायता और दूसरे लाभ देने की पेशकश की थी। 2007 में उत्तर कोरिया परमाणु हथियारों को नष्ट करने के लिए राजी भी हो गया था। इसके बावजूद परमाणु परीक्षण इस बात का द्योतक है कि उत्तर कोरिया अमेरिका समेत विश्व बिरादरी को यह बताना चाहता है कि वे उसे कमजोर करके न आंके। एक चर्चा यह भी है कि उत्तर कोरिया के नेता किम जांग इल का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है। वे अपने तीन बेटों में एक को उत्तराधिकारी बनाने चाहते हैं। ऍसे में वे इस परीक्षण के जरिए दुनिया का ध्यान उत्तर कोरिया की ऒर खींचना चाहते हैं। अब वे परमाणु परीक्षण न करने के बदले अमेरिका से मनचाही मदद ले सकते हैं। फिलहाल परमाणु संपन्न अन्य देशों से उत्तर कोरिया की जबरदस्त तनातनी चल रही है। इसी क्रम में उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी भी दे दी है। उसने प्लूटोनियम बनाने वाले एक संयंत्र को दोबारा चालू कर दिया है। उत्तर कोरिया ने अमेरिका तक को भी चेतावनी दे डाली है कि यदि उसने सैन्य कार्रवाई के नापाक इरादे नहीं छोड़े तो अंजाम गंभीर होंगे। उत्तर कोरिया किसी भी हमले का जवाब देने को तैयार है। इधर, बढ़ती खींचातानी को देखते हुए रूस ने परमाणु युद्ध की आशंका जतायी है। साथ विश्व समुदाय से सोच-समझकर कार्रवाई करने की अपील की है। उत्तर कोरिया के इस रवैये से अमेरिका स्तब्ध है। अमेरिका जानता है कि उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था चरमरायी हुई है। उसे अपने देश के लोगों को खिलाने के लिए भी सहायता की जरूरत है। ऍसे में परमाणु परीक्षण की क्या जरूरत पड़ गयी? विश्व समुदाय हर हाल में उत्तर कोरिया के इस अभियान को रोकना चाहता है। परंतु सबसे अधिक चिंता अमेरिका को है। क्योंकि एक छोटा देश होने के बावजूद उत्तर कोरिया ने सिर उठाने की जुर्रत की है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें