बुधवार, 20 मई 2009

वाकई मर गया प्रभाकरण !

श्रीलंका ने अधिकारिक रूप से 19 मई को घोषणा कर दी कि लिट्टे प्रमुख प्रभाकरण मारा गया। प्रभाकरण का शव भी मिल गया। श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि पच्चीस साल बाद तमिल विद्रोहियों से श्री लंका मुक्त हो गया। राजीव गांधी की हत्या में भी प्रभाकरण का ही हाथ था। इस लिहाज से भारत के लिए यह एक बहुत बड़ी खुशखबरी है, परंतु एक सवाल यह भी है कि क्या वास्तव में प्रभाकरण इतनी आसानी से मारा गया। हालांकि श्रीलंका की सेना ने जब ठोक-बजाकर हर तरह से तसल्ली कर ली। इसके पश्चात ही महिंदा राजपक्षे ने अपना बयान दिया। प्रभाकरण की लाश की पहचान ऍसे लोगों से भी करायी गयी है जो कभी उसके नजदीक रहे थे। इसके बावजदू प्रभाकरण मारा गया, इस बात पर यकीन नहीं होता। हालांकि इसमें शक की गुंजाइश नहीं है। परंतु, एक तरफ श्रीलंका की सरकार जब प्रभाकरण की लाश मिलने की पुष्टि कर रही थी। दूसरी तरफ उसके कुछ समर्थक भी बयान दे रहे थे कि प्रभाकरण जिंदा हैं। श्री लंका की सरकार के दावे के बाद भी कुछ सवालों के जवाब नहीं मिल रहे हैं। प्रभाकरण की उम्र कोई 54 के आसपास थी। परंतु उसका शव उसके बेटे से अधिक जवान दिखा। उसके चेहरे पर कोई झुर्री नजर नहीं आ रही थी। श्रीलंका का एकबार बयान आया कि भागते वक्त सेना ने मार गिराया। फिर बयान आया कि उसने भागने की कोई कोशिश नहीं की। उसके समर्थकों की मानें तो वह जिंदा और सुरक्षित है। यदि उनकी यह कल्पना हकीकत है तो तत्काल प्रभाकरण सामने आनेवाला नहीं है। वह इस मौके का फायदा उठाकर किसी सुरक्षित स्थान पर शरण लेगा। इसके पश्चात लड़ाकू क्षमता मजबूत करेगा। प्रभाकरण का दिमाग एक साथ कई ऒर काम करता था। ऍसे में यह संभव है कि मेडिकल साइंस की मदद से खुद के बचाव के लिए एक कवच बनाया हो जिसका इस्तेमाल इस बुरे वक्त में इस रूप में किया हो। प्रभाकरण की डीएनए जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं। श्रीलंका की सेना ने दो घंटे में ही यह टेस्ट पूरा कर लिया जबकि इस टेस्ट के लिए चार घंटे से अधिक का समय चाहिए। यह भी एक सवाल उठ रहा है कि घने जंगलों में कैसे इस जांच को पूरा किया गया। प्रभाकरण का संबंध भारत के झारखंड राज्य से भी था। वह एक बार झारखंड आया भी था। लिट्टे समर्थक भारतीय नेता पी. नेदुमारन ने भी दावा किया है कि प्रभाकरण जिंदा है और सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा है कि वे दोबारा सक्रिय होंगे। इसमें एक बात और सामने आ रही है कि प्रभाकरण तो मर गया अब कहीं लिट्टे का आंदोलन कमजोर न पड़ जाए। इसलिए उसके समर्थक इस तरह के बयान देकर श्रीलंका की सरकार को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उम्मीद है कि श्रीलंका की सरकार जल्द ही इस भ्रम पर भी विराम लगा देगी।

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