सोमवार, 18 मई 2009

देश में हो स्थायी सरकार

इस चुनाव में जनता ने कांग्रेस को वोट देकर साबित कर दिया कि सबको विकास के साथ देश में स्थायी सरकार चाहिए। मिली-जुली सरकार न तो जनता के विश्वास पर खड़ी उतर पाती है न ही देश हित में कोई बड़ा फैसला ही ले पाती है। यह अलग बात है कि बिहार में कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें ही मिलीं। इसकी वजह यहां के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं जो जनता की नजर में विकास पुरुष हैं। अब तक नीतीश ने लाखों बेरोजगार युवकों को रोजगार दिया है। इसमें बड़ी संख्या में टीचर की बहाली भी है। जनता ने इस बार बिहार में बाहुबली सहित लोजपा का सूपड़ा भी साफ कर दिया। नीतीश लहर कुछ इस तरह बही जिसमें बड़े-बड़े दिग्गज बह गये। बड़े स्तर पर कराये गये सर्वे में यह बात सामने उभरकर आयी कि जनता ऍसी ही सरकार चाहती है जो पांच साल तक स्थायी रहे। वह बार-बार चुनाव को झेलने के लिए तैयार नहीं है। वोटर वो चाहे हिन्दू हो या मुसलमान सभी को चाहिए 'विकास'। मंदिर बने या मस्जिद यह सब बाद में पहले रोजी-रोटी और सुरक्षा चाहिए। यही कारण है कि भाजपा को पिछले चुनाव से इस बार बीस सीटें कम मिलीं। पिछले चुनाव में भाजपा को 138 जबकि इस बार 118 सीटें ही मिलीं। वहीं कांग्रेस को पिछली बार 145 अबकी 206 सीटें मिलीं। यदि यूपीए गठबंधन की बात करें तो इसके पास 261 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए 272 के जादुई आंकड़े पार करने के लिए यूपीए को जितनी सीटें चाहिए, उससे कई गुना अधिक निर्दलीय सहित सपा-राजद बिना शर्त अपना समर्थन देने के लिए तैयार हैं। भाजपा ने चुनाव से पहले कई लुभावने पांसें जनता के सामने फेंके थे। हिन्दूत्व का नारा भी दिया था, परंतु सब फेल। सिर्फ हिन्दू होने या मुसलमान होने से पेट नहीं भरता। इस बात को जनता ने इस बार बखूबी समझा। जनता ने तो यूपीए सरकार के गठन के लिए फूलों का रास्ता बना दिया। अब केन्द्र में सरकार बन जाने के बाद जनता यह भी चाहेगी कि सरकार मंदी से बेरोजगार लाखों लोगों के लिए कुछ करे। वे कंपनियां जो बर्बाद होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं, सरकार इनके लिए भी कुछ करे। जनता की नजर इसपर भी रहेगी कि सरकार देश को कैसे मंदी से उबारती है। सैकड़ों कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को यह कहकर इन्क्रीमेंट नहीं दिया कि कंपनी घाटे में चल रही है। इन सबकी नजरें नयी सरकार रहेंगी। पाकिस्तान, आंतकवाद जैसे मुद्दे देश में मुंह खोले खड़े हैं। देश में महंगाई की दर भले ही घटी हो परंतु हर चीज की कीमत में भारी उछाल आया है। करोडों गरीबों को दाल-रोटी नसीब नहीं हो रहा है। नयी सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाती है।

3 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा ही होगा-ऐसा मान कर चलें.

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  2. जनता ने परेशां होकर सही फैसला किया..इस बहाने छुट बहिये...नेताओं से तो मुक्ति मिली...जो अपनी हरकतों से शर्मिंदा करते थे..

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  3. और कुछ भी हो .. स्‍थायी सरकार के लिए देश और देशवासियों को बधाई मिलनी ही चाहिए।

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