मंगलवार, 23 जून 2009

बेटे के पास कैदी की तरह रहती है एक मां...

श्रवण भी एक बेटा ही था जिसकी कहानी इतिहास के पन्ने में दर्ज है। आज भी हर मां-बाप श्रवण तुल्य बेटा चाहते हैं। परंतु इतिहास तो इतिहास ही है। हां, कभी-कभार ऍसे बेटे की चर्चा सुनने को जरूर मिल जाती है, जो अपने मां-बाप को भगवान का दर्जा देते हैं। उन्हें पलकों पर बिठाकर रखते हैं। वर्ना अधिकतर क्रूर संतान की बात ही सामने आती है। हम यहां एक ऍसे बेटे की चर्चा करने जा रहे हैं जो अपनी पत्नी के कहने पर मां को प्रताड़ित करता है। उसकी मां चुपचाप इस जुल्म को वर्षों से सहती आ रही है। उसे यह जुल्म तबतक सहना होगा जबतक वह जीवित है। पर, धन्य है यह मां जो किसी के सामने यह बयान देने को तैयार नहीं है कि उसकी बहू प्रताड़ित करती है। उसका बेटा बहू के भय से खामोश सबकुछ देखता रहता है। परंतु, शायद ईश्वर से यह सब देखा नहीं गया। मां को मां न समझने वाले इस बेटे को पांच संतान हैं। चार बेटी व एक बेटा। यह बेटा भी शायद भगवान ने इसलिये दे दिया कि चौथी बेटी के जन्म के बाद यह बेटा मां से लिपट फूट-फूटकर बिलखने लगा कि उसका कोई वारिस नहीं रहेगा। मां ने दिल से आशीर्वाद देते हुए यह कहा कि हे भगवान यदि उन्होंने कोई भी अच्छा काम किया है तो इस बेटे की सभी गलतियों को माफ कर एक बेटा इसकी झोली में डाल दो। इसे मां का आशीर्वाद कहें या फिर भगवान का चमत्कार कि पांचवें संतान के रूप से इस बेटे को पुत्र की प्राप्ति हुई। इसके बाद भी बहू का रवैया नहीं बदला। उसकी दुष्टता कम होने की जगह पर बढ़ती गयी। यह सच्ची कहानी कुछ यूं है-बिहार के मुजफ्फरपुर के मझौलिया रोड में कृष्ण कुमार वर्मा का परिवार रहता है। इनका दो कमरों का अपना मकान है। यह जमीन इन्हें पिता की विरासत के रूप में मिली है। पेशे से वह बिजली विभाग में क्लर्क हैं। कद-काठी तो लंबा परंतु नजरें चुराकर बात करनेवाला है। इनकी पत्नी दो औसत महिलाओं को मिलाकर हैं। अधिकतर मुहल्लेवाले से इनकी पटरी नहीं बैठती है। यहां तक की पड़ोसी से बातचीत तक नहीं होती है। एक किरायादार को पता चला कि इनका मकान खाली है। रंजना नामक एक महिला जिसके पति बीमार रहते हैं, ने इस मकान को किराये पर ले लिया। कुछ ही समय बाद रंजना को पता चला कि इस घर में एक बूढ़ी महिला रहती हैं। इससे पहले इन्हें प्राय: किसी महिला के कराहने की आवाज सुनाई देती थी। एक दिन रूबरू होने पर बूढ़ी महिला ने बताया कि उसकी बहू उसे प्रताड़ित करती है। परंतु उन्होंने इस बात को किसी को भी न बताने के लिए कहा। यह भी कहा कि यदि किसी को बता देंगी तो वे मुकर जाएंगी। बूढ़ी महिला ने बताया कि उसके पति दारोगा से सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी मौत के बाद उनकी जिंदगी नरक से भी बदतर हो गयी है। हालांकि उन्हें पेंशन मिलती है। वे प्रतिमाह हजार रुपये से अधिक खाने के पैसे के रूप में बेटे को दे देती हैं। दवा का पैसा अलग से देती हैं। बूढ़ी महिला ठीक से चल नहीं सकती हैं। इनकी उम्र अस्सी के करीब है। इनके कंधे पर कूबड़ निकला हुआ है। पति के बनाये मकान के एक कमरे में ये दिनभर रहती हैं। शाम छह बजे इनकी बहू इन्हें ऊपर आने की इजाजत देती है। इससे पहले यदि वे पहुंची तो फिर गालियों से स्वागत होता है। दूसरी ओर रंजना को बातचीत में वृद्ध महिला की बहू ने बताया कि शादी के बाद वे काफी अनुशासन में रखती थीं। जिसका बदला वह अब ले रही हैं। वर्ष 2007 के कार्तिक छठ में वृद्ध महिला को बेटे-बहू ने एक कमरे में बंद कर दिया। उसी कमरे में खाने के लिए सत्तू-चूड़ा रख दिया। साथ ही एक बाल्टी में पीने का पानी। वृद्ध महिला उसी में रहती थी। इस बात का खुलासा तब हुआ जब शौच जाने के लिए टंकी का पानी खत्म हो गया और वृद्ध महिला ने रूम के अंदर से आवाज देकर दूसरे से मदद मांगी। इत्तफाक से रंजना उसी वक्त अपने ससुराल से लौटी थी जिस वक्त वृद्ध महिला मदद मांग रही थी। बाद में पता चला कि जब भी इनके बेटे-बहू घर से बाहर जाते हैं। इन्हें इसी तरह कमरे में बंद कर देते हैं। इससे इस मां की पीड़ा का अंदाजा सहज ही लगाया सकता है। क्लर्क बेटे-बहू का विचार भी भगवान ने कुछ यूं फेरा है कि इन्होंने अपनी पहली बेटी की शादी एक चपरासी से कर दी। दूसरे की शादी के लिए भी इसी तरह का लड़का ढूंढ रहे हैं। नौकरी के अलावा कई पेशे अपनाने के बाद भी इस घर की आर्थिक स्थिति अत्यंत नाजुक है। इसके बावजूद बहू-बेटे की समझ में यह बात नहीं आयी कि घर में मौजूद मां रूपी भगवान की इज्जत करें। उसे सम्मान दें। बेटे को जन्म देने के बाद मां गौरव से फूले नहीं समाती है कि बूढ़ापे का सहारा आ गया। परंतु अधिकतर बेटों का व्यवहार मां-बाप के हित के खिलाफ होता है। बेटे में बदलाव तब आता है जब घर में बहू आ जाती है। वहीं, बेटियों के दिल में हमेशा मां-बाप के लिए बेटों से अधिक प्यार होता है। इसके बावजूद समाज के लोग बेटे के लिए तरसते हैं। मुझे जब इस बात का पता चला तो मैंने हस्तक्षेप भी किया, परंतु बूढ़ी मां कोई भी बयान अपने बेटे के खिलाफ देने के लिए तैयार नहीं हुईं। देश में मौजूद कानून की विडंबना यह है कि उसे हर कार्रवाई के लिए सबूत चाहिए। ऍसी हजारों माताएं प्रतिदिन अपने बेटे-बहू से प्रताड़ित होती हैं। इसके बावजूद वे उफ तक नहीं करती। मेरा मानना है कि ऍसे बेटों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

7 टिप्‍पणियां:

  1. अफसोसजनक और दुखद!

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  2. ये तस्वीर आये दिन किसी न किसी शहर-गांव-कस्बे-मुहल्ले मे देखने को मिल जाती है।

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  3. इस घटना को सुनकर बहुत तकलीफ हुई .. समझ में नहीं आता .. सगे बच्‍चे मां बाप के साथ ऐसे व्‍यवहार कैसे कर लेते हैं ?

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  4. Jaisee karani waisee bharani...
    Aaj yeh apani maa ko dukh dete hain.. kal inkaa betaa bhi yahi seekh kar aisaa hi kare to???

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  5. ye to pagalpan hai. per is post ko padhne walo ko jarur siksha milegi ki we kam se kam apni maa ke sath aisa na kare.

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  6. अक्सर सुना जाता है की फलां की बीवी आते ही बेटे ने माँ बाप को दुःख देना शुरू कर दिया.... मेरा सोचना है की क्या बेटे की अपनी कोई सोच समझ नहीं होती.

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