सोमवार, 6 जुलाई 2009

विपक्ष के पाले में सिर्फ तल्ख टिप्पणी

केन्द्र की सत्ता की बागडोर चाहे कांग्रेस के पाले में हो या भाजपा के या फिर मिलीजुली ही क्यों न हो? विपक्ष में बैठने वाला हमेशा सत्ता पक्ष की बुराई ही ढूंढ़ता है। विपक्ष की नजर में सरकार कभी कोई अच्छा काम नहीं करती। या यूं कहें कि कर ही नहीं सकती है। पुनः विपक्ष में बैठने वाला जब सत्ता संभालता है तो उसे खुद के फैसले ही सही लगते हैं। वहीं, सत्ता पक्ष से विपक्ष में आनेवाले दल को वही रोग लग जाता है। विपक्ष हमेशा आलोचना कर जनता के सामने यह साबित करने की कोशिश करता है कि वही उसका सच्चा हमदर्द है। बेचारी भोली-भाली जनता ही इन नेताओं को सबसे बड़े मूर्ख नजर आते हैं। आज गांव की जनता भी नेताओं की तिकड़म को समझ चुकी है। ऎसा नहीं है कि सत्ता पक्ष में बैठनेवाली पार्टी हमेशा सही फैसला लेती है। कई बार तो उसके गलत फैसले से दर्जनों लोगों की जानें भी चली जाती हैं। वास्तव में विपक्ष को सरकार के वैसे ही फैसले का विरोध करना चाहिए जो देश हित में जरूरी है। देश की आजादी के बाद विपक्ष का इतिहास रहा है कि वह सरकार के हर फैसले का विरोध करता है। साल में कुछ फैसले ही ऍसे होते हैं जिसमें विपक्ष चुपचाप हामी भर देता है। ये फैसले अधिकतर देश की रक्षा से संबंधित होते हैं। विपक्ष इस मामले में इसीलिए विवश होता है कि देश हित के फैसले का विरोध करने पर देश की जनता की नजर में वह बेनकाब हो जाएगा। देश के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने 6 जुलाई को आम बजट पेश किया। इसमें अनगिनत बातें समाहित हैं। देश की रक्षा पर 34 प्रतिशत राशि की बढ़ोतरी की गयी है। पाकिस्तान और चीन के बढ़ते सामरिक ताकत के मद्देनजर यह अत्यंत ही जरूरी था। उसी तरह किसानों के लिए पैकेज की घोषणा तारीफ के काबिल है क्योंकि किसान देश की रीढ़ होते हैं। मंदी से निबटने के लिए भी प्रयास किया गया है। हालांकि यह काफी नहीं है। इसी तरह प्रिंट मीडिया को भी राहत दी गयी है। अल्पसंख्यकों, कमजोर तबके के लोगों की तरफ भी वित्त मंत्री ने ध्यान दिया है। हर साल 1.20 करोड़ लोगों को नौकरी मिले, इसके लिये भी कोशिश की गयी है। जीवनरक्षक दवाएं को सस्ती की गयी हैं। इससे गरीबों को भी फायदा होगा। बड़ी कारें, मकान, खेल के सामान, एलसीडी टेलीविजन, मोबाइल, कंम्यूटर, प्रेशर कुकर, ब्रांडेड गहने, सीएफएल बल्ब, चमड़ा उत्पाद को इस बजट में सस्ता किया गया है। इसी तरह सोना-चांदी, कपड़े, किचन के सामान मंहगे कर दिये गये हैं। प्रेशर कुकर, बल्ब सस्ता होने से गरीब भी लाभान्वित होंगे। इसके बावजूद आम जनता सबसे पहले चावल, दाल, सब्जी सस्ती हुई है या नहीं इस बात पर ज्यादा ध्यान देती है। बजट में ये चीजें सस्ती नहीं की गयी हैं । सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम पहले ही बढ़ा चुकी है। ऎसे में मालभाड़ा बढ़ने से चीजों के दाम तो यूं ही बढ़ जाएंगे। इसके अलावा वित्त मंत्री ने रेलवे से आने-जाने वाली कई चीजों पर सेवा कर लगा दिया है। इसका असर भी कहीं न कहीं महंगाई के रूप में सामने आएगा। विपक्ष को वजट के उस फैसले का स्वागत करना चाहिए जिसका फायदा गरीबों और आम जनता को प्रत्यक्ष रूप से होने जा रहा है। मसलन दवाएं सस्ती होने से गरीबों को भी लाभ होगा। किसानों के प्रति सरकार की विशेष रुचि भी प्रशंसनीय है। आम आदमी को दाल-रोट-सब्जी सस्ती दर पर मिले, विपक्ष को इस बात के लिए चिंतित होना चाहिए। लाखों गरीब मजदूर जो सौ रुपये भी प्रतिदिन नहीं कमा पाते, इन्हें दाल-भात-सब्जी इक्ट्ठे नसीब नहीं हो पाती। सत्ता पक्ष तो इस बारे में गंभीरता से कभी नहीं सोचता, क्योंकि बजट बनाने में जो अधिकारी सहयोग देते हैं, ये गरीब नहीं होते। ये एयरकंडीशन में बैठकर बजट को अंतिम रूप देते हैं। ये गरीबी और उसके थपेड़ों से कोसों दूर रहते हैं। ऎसे में इन्हें कीड़े-मकोड़े की तरह रहनेवाले गरीब की जिंदगी के बारे में थोड़ा अहसास भी नहीं हो पाता। ऎसे मुद्दे पर विपक्ष को आवाज उठानी चाहिए। परंतु अफसोस विपक्ष के पास सिर्फ तल्ख टिप्पणी है वोट से अलग कार्य नहीं।

1 टिप्पणी:

  1. रविकांत जी, बिल्कुल सही लिखा है आपने....विपक्ष अपने नाम को हमेशा से जस्टिफाई करती आई है। विपक्ष मतलब विरोध....अब अपने राज्य में ही देख लीजिए। राबड़ी-लालू, नितिश के अच्छे कामों में भी कहां-कहां से नुस्ख खोज लाते हैं। विपक्ष को Quality testing department में होना चाहिए।

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