सोमवार, 9 नवंबर 2009

कैंसर है, टीएमसीएच भागिए

कैंसर आज भी लाइलाज बीमारी है। यूं तो इस रोग के विशेषज्ञों का मानना है कि पहले स्टेज में पता चलने पर इसका इलाज संभव है। परंतु हकीकत ठीक इसके उलट है। प्रारंभिक स्थिति में इसकी जानकारी वैसे ही लोगों को मिल पाती है, जो या तो खुद इस रोग के डाक्टर हैं या फिर ऐसे संपन्न लोग जो सर्दी होने पर भी चिकित्सकों की लंबी लाइन लगा देते हैं। अब चलते हैं उत्तर बिहार-जहां कैंसर का एक भी डाक्टर नहीं है। इस इलाके के लोगों को जब यह पता चलता है कि उसे कैंसर है। हांफता-भागता वह पटना या दिल्ली पहुंचता है। जांच में पता चलता है कि वह अब चंद दिनों का ही मेहमान है। यह जानकर भी ताज्जुब होगा कि उत्तर बिहार में अन्य रोगों के चिकित्सकों की कोई कमी नहीं है। सरकारी अस्पतालों में भी कैंसर का कोई चिकित्सक नहीं है। मुजफ्फरपुर को बिहार का व्यावसायिक राजधानी माना जाता है यहां का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एसकेएमसीएच में भी इस रोग के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में यहां के रोगी, कैंसर का शक होते ही पटना भागते हैं। अब चलते हैं बिहार की राजधानी पटना। यहां महावीर कैंसर संस्थान के अलावा आधा दर्जन से अधिक चिकित्सक नहीं हैं, जो यह पता लगा सकें कि मरीज को कैंसर है या नहीं। सेकेंड स्टेज वाले कैंसर रोगी का आपरेशन भी यहां सफल नहीं हो पाता है। कई रोगी का आपरेशन तो चिकित्सक पैसे की खातिर कर देते हैं, परंतु ये छह माह से भी अधिक जीवित नहीं रह पाते। वे भी आपरेशन के बाद बेड पर आश्रित की जिंदगी जीते हैं, खुद कुछ भी करने में असमर्थ रहते हैं। कैंसर के इलाज मामले में आज भी बिहार अन्य राज्यों से काफी पीछे है। ऐसे में यदि कैंसर है तो रोगी को सीधे मुंबई टीएमसीएच जाना चाहिए या फिर दिल्ली का एम्स। हालांकि दूसरे स्टेज में पहुंचने पर रोगी यहां भी नहीं बच पाते परंतु शारीरिक चीडफ़ाड़ का सामना कम करना पड़ता है। वैसे इस बीमारी की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जेड गुडी को इंग्लैंड जैसा विकसित राष्ट्र भी इलाज नहीं कर सका। जेड गुडी आपरेशन के कुछ ही माह बाद ईश्वर के पास आराम करने चली गईं। भारत सरकार व राज्य सरकारों को कैंसर जैसी बीमारी के बारे में गंभीरता से विचार-विमर्श करना चाहिए। बिहार में तो सरकार ने कभी कैंसर की भयावहता के बारे में गंभीरता से विचार ही नहीं किया। यदि ऐसा हुआ रहता तो संभवत: उत्तर बिहार में भी कई कैंसर के अच्छे डाक्टर होते। कैंसर के उन डाक्टरों पर तो कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, जो जानते हुए भी कि कैंसर का मरीज छह माह भी नहीं जीवित रहेगा, जीवन का प्रलोभन देकर आपरेशन कर देते हैं। पटना के ही एक चिकित्सक वीपी सिंह ने पचहतर वर्षीय स्व. हरेन्द्र प्रसाद का माउथ कैंसर का आपरेशन यह कह कर किया कि आपरेशन के बाद वे पांच साल तक जीवित रहेंगे। परंतु श्री प्रसाद आपरेशन के बाद न तो बोल सके, न खा सके और न ही चल सके। आपरेशन के बाद इन्हें पाइप से खाना दिया जाता रहा। वे बिस्तर से कभी नहीं उठ सके और छह माह में ही इनकी मौत हो गई। आपरेशन में चिकित्सक ने एक लाख से अधिक रुपए किसी न किसी तरह से ऐठें। हालांकि इस चिकित्सक पर परिजन अदालत में केस दर्ज करने की तैयारी में जुटे हैं। कुल मिलाकर इसी तरह के चिकित्सकों की भरमार पटना में भी है। अत: कैंसर है तो टीएमसीएच या एम्स या ऐसे जगह भागिए जहां आपको सही चिकित्सा मिले। सीतामढी के एक चिकित्सक डॉ रामाकांत सिंह उत्तर बिहार के मशहूर सर्जन थे। एकाएक इन्हें बुखार हुआ, एंटिबायोटिक से भी जब बुखार नहीं उतरा तो वे एम्स गए, जहां चिकित्सकों ने बताया कि इन्हें बल्ड कैंसर है वो भी अंतिम स्टेज में। वे माह भर के अंदर ही गुजर गए।

2 टिप्‍पणियां:

  1. सही समय पर सही इलाज हो पाना ही इस विकट समस्या को काबू करने की कुंजी है ---निःसंदेह बंबई का टाटा मैमोरियल हास्पीटल कैंसर की चिकित्सा के लिये देश में सर्वोतम है। वे इस तरह के मरीज़ों को इतनी निपुणता, सहजता एवं समझदारी से हैंडल करते हैं कि मरीज़ अपने आप को ( और शायद उसके घरवाले भी ?) किसी भी तरह की स्थिति के लिये तैयार कर लेता है ।

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  2. dear brother
    u have rised such a nice issue but who will pay heed to this thing becoz government is buzy in HIV-AIDS , H1-N1 kind of things which attrect money from foreign nations, but it is not a full story first government takes aid from these nations and again they spend same money towards procurement of medicines from same nation it means these nation always in profit one hand they give money to india and other hand there pharma comapny take the money back from india. so who is in loss government , no its poor people of india those who cant afford even maleria but govt spending money in HIV AIDS, H1N1.
    Anybody kindly let me know that who is suffering most by H1NI(SWINE FLU) its not poor countryman, thse r people who frequently visit foreign countries it means only reech people suffering from swine fly, this the main cause why government feeling that much pain. if poor countryman die who will pay attention. a person died of due to PM'S VISIT.

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