शुक्रवार, 13 नवंबर 2009

अमेरिका ने माना-प्रतिभावान हैं भारतीय

हर भारतीय युवक ऊंची शिक्षा के लिए विदेश जाना चाहता है, उसे लगता है कि वहां की पढ़ाई भारत से अधिक उच्चस्तरीय है। युवाओं के मन में यह भी शंका रहती है कि अमेरिका, इंग्लैंड के लोग भारतीय से अधिक प्रतिभावान होते हैं। परंतु यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह इंडियन व एशियाई देशों की कल्पना के सिवा कुछ नहीं है। अब यह सवाल उठता है कि यदि यह कल्पना है तो फिर आज दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका कैसे है? मान लीजिए-यदि कोई गरीब तपती गर्मी में ढिबरी की रोशनी में पढ़ाई कर रहा है। ऐसे में उसका आधा ध्यान शरीर से निकलने वाले पसीने और आधा ध्यान मच्छरों से लड़ते हुए निकल जाता है। वहीं, एयरकंडीशन में बैठकर पढऩे वाले छात्र बिना किसी परेशानी के पढ़ाई पूरी कर लेता है। अब जरा इसपर विचार कीजिए कि ढिबरी में पढऩे वाले छात्र ने अधिक मेहनत की, परंतु परीक्षा में उसे कम माक्र्स मिले। वहीं, एयरकंडीशन में पढ़ाई करनेवाले छात्र को अधिक। इतना ही नहीं दूसरे वर्ग वाले छात्र के पास कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा भी है। अब चलते हैं अमेरिका में-यहां भारतीय छात्र को पढ़ाई के लिए आधुनिक सुविधा मिल जाती है और वह जी-तोड़कर शिक्षा हासिल करने लगता है, उसे कुछ कर जो दिखाना है? यही कारण है कि भारतीय छात्र अमेरिका, इंग्लैण्ड, जापान में जाकर पताका फहरा रहे हैं। भारतीय छात्र की मेहनत के आगे अमेरिकी छात्र टिक नहीं पा रहे हैं। एक सर्वेक्षण में जब यह बात सामने आई तो अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा पिछले दिनों चिन्तित हो उठे और यहां के छात्रों को पढ़ाई के प्रति ध्यान देने की नसीहत दे डाली। ओबामा की इस चिंता से भारतीय छात्रों को और उत्साहित होना चाहिए। यह भी जानकार आश्चर्य होगा कि इंग्लैंड व कई अन्य देशों की सरकार भी भारतीय छात्रों की प्रतिभा का उदाहरण देने लगे हैं। इन देशों में स्कूल-कॉलेज की तरफ से कई अनुसंधान भी चल रहा है। कई बड़े स्तर के प्रोफेसर इस अभियान में जुटे हैं कि उनके देश के छात्र कमजोर न हों। ये बातें भारतीय छात्रों के इरादे को और मजबूत करती हैं। भारत के कई ऐसे मां-बाप भी अपने बच्चे को विदेशों में भेजते हैं, जिनकी हैसियत अत्यंत कमजोर होती है। ऐसे में यदि यह बेटा अपनी प्रतिभा का पताका नहीं फहराएगा तो इनका दिल तो टूटेगा ही साथ ही अन्य अभिभावक भी निराश होंगे। यह अलग बात है कि भारतीय प्रतिभा को दबाने की कोशिश कुछ देश करते हैं। अभी हाल ही में आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हमले किए गए। इतिहास गवाह है कि भारतीय शुरू से ही मजबूत कलेजा रखते हैं। इनका हौसला तोडऩा किसी देश के लिए आसान नहीं है। इस बात को दूरदर्शी बराक ओबामा ने थोड़ा ही सही महसूस तो किया ही है, तभी वे अपने देश के नौजवानों की चिंता में डूब गए हैं। आज दुनिया के अधिकतर देशों में भारतीय छाए हुए हैं। उनकी प्रतिभा बोल रही है।

5 टिप्‍पणियां:

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  2. अच्छा लगता है जानकर...भारतीयों का परचम यूँ ही लहराता रहे.

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  3. बिलकुल सही है कम से कम स्कूली शिक्षा तक तो सही है धन्यवाद्

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  4. भारतीय प्रतिभा के मामले में पहले भी आगे थे और आज भी हैं. वे स्कूली शिक्षा तो अपनी मेहनत और सीमित संसाधनों के बूते पूरी कर लेते हैं लेकिन उच्च शिक्षा और अनुसन्धान के मामले में जिस तरह के संसाधनों की आवश्यकता होती है वह किसी अकेले के बूते से बाहर की बात होती है और उसे सरकार का मुंह ताकना पड़ता है.यहाँ सरकारी उदासीनता, भ्रष्टाचार, नौकरशाही की लालफीताशाही में फंसकर ऐसे तमाम छात्रों की प्रतिभा दम तोड़ देती है और जो समर्थ होते हैं वे विदेशों का रूख कर लेते हैं.

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