शुक्रवार, 25 दिसंबर 2009

शिबू ही बनेंगे झारखंड के मुख्यमंत्री!


झारखंड विधानसभा में खंडित जनादेश के बाद भी सत्ता की 'कुंजी' झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सुप्रीमो शिबू सोरेन (गुरुजी) के हाथ में ही है। शिबू को किसी पार्टी के नेता के साथ सरकार बनाने में कोई परहेज नहीं है। यानी हर हाल में शिबू को चाहिए मुख्यमंत्री की कुर्सी? 23 को हुए झारखंड विस चुनाव की मतगणना में कांग्रेस गठबंधन को 25, भाजपा को 18, जदयू को 02, राजद को 05, झामुमो को 18 और अन्य को 13 सीटें मिली हैं। कांग्रेस यदि गुरुजी को मुख्यमंत्री मान ले तो झामुमो और कांग्रेस गठबंधन की कुल 43 सीटें हो जा रही हैं, जो सरकार बनाने से दो अधिक है। सरकार बनाने के लिए यहां 41 सीटें चाहिए। मगर कांग्रेस शिबू को मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहती। झारखंड की अंदरुनी हालत काफी खराब है, इस बात को कांग्रेसी नेता बखूबी समझते हैं। कुछ कांग्रेसी नेता दबी जुबां में आलाकमान के सामने विरोध भी दर्ज करा चुके हैं। 25 दिसंबर 09 को झामुमो विधायक दल के नेता के रूप में शिबू सोरेन चुन लिए गए हैं। इसके साथ ही सरकार बनाने की सियासत और तेज हो गई है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा ने गुरुजी की तरफ पांसे फेंक दिए हैं, इसी के भरोसे शिबू मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज होना चाहते हैं। हालांकि अबतक किसी दल के नेता की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन कांग्रेस को सत्ता में आने से रोकने के लिए भाजपा सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा शिबू को समर्थन देने के लिए तैयार हैं। मुंडा शिबू खेमे के पल-पल की सूचना ले रहे हैं। कांग्रेस खेमा भी गहन विचार-विमर्श में डूबा है। अब देखना यह है कि गुरुजी किसकी मदद से मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते हैं? शिबू पहले ही बयान दे चुके हैं कि वे किसी दल को 'अछूत' नहीं मानते हैं। राज्य की 81 सदस्यीय विधानसभा सीटों में अकेले झामुमो के पास 18 सीटें हैं। ऐसे में सब पार्टियों की नजर शिबू की ओर ही है। इधर, केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोध कांत सहाय का कहना है कि शिबू को सरकार बनाने में कांग्रेस दो बार मदद कर चुकी है। कांग्रेस ने शिबू को 2005 में बाहर से सरकार बनाने में समर्थन दिया था, यह अलग बात है कि सरकार सिर्फ नौ दिन ही चल पाई थी। पुन: 27 अगस्त 2008 से 12 जनवरी 2009 तक शिबू सोरेन को कांग्रेस ने बाहर से समर्थन दिया था। मालूम हो कि झारखंड चुनाव में अबकी कांग्रेस-झाविमो को 25 सीटें मिलीं। कांग्रेस की सीटें नौ से बढकर इसबार 14 हो गई। वहीं, भाजपा-जदयू को भारी नुकसान उठाना पड़ा। झामुमो को एक सीट का फायदा हुआ। राजद को दो सीटों का नुकसान हुआ। लोजपा का तो खाता ही नहीं खुला।

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