शनिवार, 26 दिसंबर 2009

सीतामढ़ी में शुंगकालीन तीन मूर्तियां


सरस्वती के उपासक रामशरण के पास हैं प्रतिमाएं :  यह जानकर हैरत होगी कि बिहार के सीतामढ़ी में भी शुंगकालीन तीन मूर्तियां हैं, पर है सौ फीसदी सच। वर्ष 1977 में भारत सरकार के अभिलेखों में इन मूर्तियों के नाम दर्ज किए गए। पेशे से व्यवसायी पर सरस्वती के सच्चे उपासक रामशरण अग्रवाल विगत चार दशकों से इन मूर्तियों को संभालकर एक बैंक के लॉकर में रखे हुए हैं। सीतामढ़ी शहर के कोट बाजार निवासी रामशरण उम्र के 64वें वर्ष में भी विद्यार्थी की तरह आठ घंटे पुस्तकों और अखबारों में उलझे रहते हैं। श्री अग्रवाल से जब इन मूर्तियों सहित कुछ सवाल पूछे गए तो वे कुछ मिनटों के लिए खामोश हो गए। शीघ्र ही तंद्रा तोड़ते हुए कहा कि 'स्वस्थ सोच संपदा बनाती है परंतु संपदा स्वस्थ सोच नहीं बनाती है।' इसे आत्मसात करने की जरूरत है। शुंग कालीन मूर्तियों के बारे में कहा कि 1966-1970 के बीच उन्होंने दरभंगा से पूर्वी चंपारण के छौड़ादानों प्रखंड की जुआफर पंचायत तक पैदल यात्रा की थी। इसी क्रम में जुआफर गांव में रुके। यहां के दो-तीन किसानों के पास पुरानी मूर्तियां देखीं। पहचानते देर न लगी कि ये मूर्तियां शुंग काल की हैं। मूर्तियों के प्रति इनकी रुचि देख वैद्यजी के नाम से प्रसिद्ध एक किसान ने इन्हें तीन मूर्तियां भेंट कीं। वैद्यजी ने श्री अग्रवाल को बताया कि पुरानी मूर्तियां उन्हें खेत की खुदाई में मिली थीं। यहां के कई पुराने घरों में भी ऐतिहासिक ईंट का इस्तेमाल किया गया था। 1972 में मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज में ऑल इंडिया हिस्ट्री कांग्रेस का अधिवेशन हुआ,जिसमें बतौर डेलीगेट श्री अग्रवाल ने शिरकत की और मूर्तियों की चर्चा अधिवेशन में आए काशी प्रसाद जायसवाल इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. बीपी सिन्हा (अब स्वर्गीय), जैन एवं प्राकृत रिसर्च इंस्टीट्यूट वैशाली के निदेशक डॉ. रामेश्वर तांतिया (अब स्वर्गीय) और डॉ. देसाई नागपुर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष समेत दर्जनों विद्वानों के समक्ष की। सभी चौंक गए और कहा कि इसे देखने से उत्तर बिहार के पुरातत्व के प्रति धारणा ही बदल गई। 1977 में डॉ. माधवी अग्रवाल, भूतपूर्व निदेशक, पटना संग्रहालय के नेतृत्व में एक टीम आई और मूर्तियों का निरीक्षण कर भारत सरकार को अभिलेखों में दर्ज करने के लिए लिखा, जिसे मंजूर कर लिया गया। 1981 में सीतामढ़ी से नेपाल-तिब्बत सीमा तक स्कूटर से यात्रा करनेवाले और शेयर विशेषज्ञ श्री अग्रवाल को मंदी के बारे में तीन साल पूर्व ही आभास हो गया था। उन्होंने बताया कि कुषाण काल में भारत की विश्व जीडीपी में 22 फीसदी, ईस्ट इंडिया कंपनी के शुरू में 6 फीसदी और फिलहाल 1 फीसदी से भी कम हिस्सेदारी रह गई है। पिछले 12 वर्षों में पश्चिम की अर्थव्यवस्था वित्तीय सेवाओं पर केन्द्रित होती गई और उत्पादन की धुरी चीन व भारत की तरफ आ गई। ऐसे में झटका लगना तय था, जो मंदी के रूप में सामने आई। भारत में निवेश के लिए जल प्रबंधन एवं पर्यटन को वे सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। 1983 में सीतामढ़ी यात्रा के दौरान सच्चिदानंद हीरानंद (अज्ञेय जी), जैनेन्द्र कुमार जैसे साहित्य के विद्वान भी इनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके थे। इन विद्वानों से रामशरण को आशीर्वाद मिला। रामशरण को गुरु-शिष्य परंपरा में अटूट आस्था है और गौतम बुद्ध को मानव इतिहास का महानतम शिक्षक मानते हैं, जो गुरु भी हैं और गोविन्द भी। रामशरण बताते हैं कि उन्होंने अपने बड़े भाई व सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश बीएन अग्रवाल से बहुत कुछ सीखा है।

अध्ययनशील व कुशल वक्ता भी : आशा
इंग्लैंड में शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित और बिहार की निवासी आशा खेमका (यूके में न्यू कॉलेज नॉटिंघम में प्रिंसिपल और चीफ एक्जीक्यूटिव हैं) ने टेलीफोन पर बताया कि रामशरण एक अध्ययनशील व्यक्ति के साथ कुशल वक्ता भी हैं, जिनके हर शब्द नपे-तुले रहते हैं। कहा कि नेशनल ज्योग्राफिक एवं एकॉनामिस्ट, इंडिया टुडे, टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, दैनिक जागरण समेत दर्जनभर से अधिक पत्र-पत्रिकाओं के रेगुलर पाठक हैं। आशा को अपने नाम के साथ ओबीई (ऑर्डर ऑफ ब्रिटिश इम्पायर) लिखने का अधिकार भी प्राप्त है।

चेंजेज को पहले ही भांप लेते हैं : अरुण
बंगलूरू में भारत के एकमात्र फाइनेंसियल एक्टिविस्ट अरुण कुमार अग्रवाल ने दूरभाष पर बताया कि वे मोबाइल पर रामशरण अग्रवाल से आर्थिक मुद्दों पर प्राय: विचार-विमर्श करते रहते हैं। श्री अग्रवाल ने दावे के साथ कहा कि उत्तर बिहार में शेयर के बारे में रामशरण जैसा जानकार शायद ही कोई हो। यह भी कहा कि भविष्य में होने वाले चेंजेज को वे पहले ही भांप लेते हैं। मंदी के पहले ही उन्होंने इसकी परिकल्पना कर ली थी। महंगाई के संबंध में पूछने पर अरुण ने बताया कि फिलहाल घटने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

3 टिप्‍पणियां:

  1. आभार इस जानकारी का!

    उत्तर देंहटाएं
  2. प्रिय रविकांत जी ,

    श्री रामशरण अग्रवाल जी के बाबत आपने जो विस्तृत जानकारी दी वो बिलकुल सत्य है यह मै व्यक्तिगत तौर पर जानता हूँ / यद्यपि मै यह सोंच कर क्षुब्ध हूँ की उक्त विषय में मैंने कभी क्यों नहीं अपने ब्लॉग पर चर्चा क्यों नहीं की / खैर, मेरी गलती आपने सुधार दी आपका हार्दिक धन्यवाद / आज पहली बार आपके ब्लॉग पर मेरा आना हुआ वोभी इतेफाक से और आपके ब्लॉग पर निरंतर आना चाहूंगा इसकी कई वजहे है जो मै फिर कभी उपयुक्त स्थान पर बयान करूंगा / फिलहाल समस्या यह है की आपने अपने ब्लॉग पर ''फ्ल्लोवर '' नामका फीचर नहीं जोड़ रखा जो की किसी भी ब्लॉग पर पहुँचने का सरल माध्यम है , मेरी गुजारिस है की यह फीचर जरूर जोड़े और मेरे ब्लॉग पर शीघ्र पधारे और फोल्लोवर बने ताकि मै उसी माध्यम से पुनः आपके ब्लॉग से जुड़ सकू / थैंक्स/शेष फिर /

    उत्तर देंहटाएं