बुधवार, 14 अप्रैल 2010

गॉड! अबकी मंदिर जरूर बनवाएंगे

विधानसभा की सुगबुगाहट के साथ ही बिहार के नेताओं को याद आने लगे-मंदिर व मस्जिद। गांव की पगडंडियां भी, जर्जर सड़कें, बिजली, चापाकल व स्कूल भी। याद क्यों न आए, चुनाव सामने जो है। सत्ता में आने को व्याकुल विपक्ष के यहां सरगर्मी कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। सत्ता पक्ष ने पांच साल में क्या-क्या गलती की है, सबकुछ ताबड़तोड़ कम्प्यूटर में फीड किया जा रहा है। कई ऐसे नेता, जो प्रदेश से ज्यादा दिल्ली-बाम्बे में रहना पसंद करते हैं। इनकी गाडिय़ां भी गांवों के जर्जर मंदिर के सामने रुकने लगी हैं। दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम और क्षमायाचना का दौर भी शुरू हो चुका है। भगवान इस बार पास करा (जीता) दें, अबकी अधूरा मंदिर जरूर बनवा देंगे। यह अलग बात है कि वायदे के पक्के, इन्होंने पिछले चुनाव भी यही कहा था। एक नेताजी तो तीन चुनाव में यही वादा कर चुके थे। इस बार जैसे ही वादा किया, एक ग्रामीण तपाक से पूछ बैठा-हुजूर फिर मंदिर नहीं बना। नेताजी बोले क्या करें, विपक्ष टांगे अड़ा देता है? बाद में नेता जी के साथ खड़े व्यक्ति ने कहा, इस बार तो विपक्ष में आप ही हैं? दो दशक से लगातार चुनाव जीत रहे, नेताजी यह भी भूल गए कि उनकी सत्ता जा चुकी है। खैर, बिहार में करीब दो दर्जन विपक्ष के नेता लगातार दौरे पर हैं। इस प्रदेश में फिलहाल जदयू-भाजपा की सरकार है। यहां के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं और विपक्ष में है राजद, जिसकी कमान वास्तव में लालू प्रसाद के पास है। लोकसभा में महज चार सीटें पाकर अत्यंत कमजोर हो चुके लालू प्रसाद की नजर अब विधानसभा चुनाव है। ये हर हाल में चुनाव जीत अपनी सरकार बनाना चाहते हैं। इसके लिए अपनी पार्टी के सभी विधायकों व कार्यकर्ताओं को तैयार रहने के लिए कहा है। कार्यकर्ताओं के जोश और नीतीश सरकार की खामियों को भंजाकर ये चुनावी नैया पार करने चाहते हैं। दौरे के बहाने कई नेता लोगों की मंशा को टटोलने का काम भी कर रहे हैं। हिन्दू नेता मस्जिद के पास पहुंचकर नमाज अदा करने की भूमिका निभा रहे हैं। मस्जिद की डेंटिंग-पेंटिंग की बातें भी कर रहे हैं, तो कई अबकी जरूर मंदिर बनवाने के अपने वायदे को दुहरा रहे हैं। वहीं नीतीश सरकार के मंत्री-विधायक निश्चिंत मुद्रा में हैं। हालांकि दूरदर्शी नीतीश कुमार अंदर से कम चिन्तित नहीं हैं, फिर भी इन्हें भरोसा है कि जनता इन्हीं के साथ खड़ी है। इधर, जनता नेताओं की पालिसी को समझ रही है। बिहार के एक समाजसेजी का कहना है कि ये नेता हर चुनाव में झूठे वादे करते हैं। इस बार जनता समझदार हो चुकी है, वह ऐसे नेताओं को वोट देने से अवश्य परहेज करेगी।

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