रविवार, 12 दिसंबर 2010

हे नारद मुनी...! यह है आधुनिक पॉलिटिक्स

समय सुबह की हो या शाम की। घर की बात हो या फिर चौराहे की। टेलीविजन देखने पर या फिर रेडियो सुनने पर-एक शब्द जरूर सुनने को मिल जाता है, वह है पॉलिटिक्स। अनगिनत लोगों को तो इसका सही से अर्थ भी नहीं पता। फिर भी इस शब्द को कहने से वे नहीं चुकते। क्योंकि, इनकी नजर में थोड़े लाभ के लिए दो लोगों को लड़ा देना-पॉलिटिक्स है। पीठ पीछे गाली-मुंह पर चमचई की सीमा पार-यह है आधुनिक पॉलिटिक्स। जात के नाम पर, धर्म के नाम पर लड़ाने वाले वास्तव में आधुनिक पॉलिटिक्स को पूरी तरह से समझ चुके हैं। इसलिए-जागिए, हे नारद मुनी जी और देखिए 21 सदी के पॉलिटिक्स को। किताबों के पन्नों में नहीं बल्कि राजनेताओं के मन में, घर-घर में और व्यक्ति-व्यक्ति में। आपकी हर राजनीति (इतिहास के पन्ने में सिमटे) इसमें डुबती नजर आएगी। वर्तमान की राजनीति में सिर्फ स्वयं का बोध होता है। स्वयं को कैसे बड़ा बनाएं। स्वयं का विकास कैसे करें। ऊपरी तबके से निचले तबके तक में इसका समावेश है। घर में भाई-भाई के बीच तालमेल नहीं है। जन्म देने वाली मां तक को बुढ़ापे में छोड़ दिया जाता है। किसके भरोसे, यह बड़ा सवाल है? गरीब पिता को पिता कहने में पढ़े-लिखे नौजवानों को शर्म आती है। ऐसे शख्स की सच्चाई जब सामने आती है तो उसे कोई अफसोस नहीं होता, कोई झिझक नहीं होती। लेकिन बोल जरूर फूट पड़ते हैं...पॉलिटिक्स करनी पड़ती है। पहले पॉलिटिक्सि की बातें बहुत ऊंची मानी जाती थीं, अब तो चाय दुकानदार भी बासी चाय को ताजा कहकर बेच डालता है। यदि किसी ने शिकायत कर दी तो बिफरते हुए बताता है-बेचने के लिए पॉलिटिक्सि करनी पड़ती है। ऐसे में कई ग्राहक कहीं और का रुख कर जाते हैं। बावजूद, थोड़े से फायदे के लिए वह गलत काम करने से बाज नहीं आता। हर शहर में भ्रष्ट्राचार का प्रवेश हो चुका है। भ्रष्ट्राचार को रोकने के लिए जांच एजेंसियां भी बनीं-सीबीआई, ईडी, सीवीसी, जेपीसी। परंतु हर जगह आधुनिक पॉलिटिक्स ही पॉलिटिक्स। ऐसे में कहां से होगा इंसाफ? और करेगा कौन? झारखंड राज्य बनने के पहले बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने कहा था कि उनके शव पर राज्य का बंटवारा होगा। जीते जी वे झारखंड राज्य नहीं बनने देंगे। कुछ ही समय पश्चात झारखंड राज्य बना। कहां गया लालू का बयान। यह है आधुनिक पॉलिटिक्स। इससे बिहार कितना पीछे चला गया। कभी-कभी तो एक झूठ से समूह प्रभावित हो जाता है। कई की जानें चली जाती हैं। फिर किसी राजनेता का बयान आता है कि छोटी-मोटी घटनाएं तो होती ही रहती हैं। यह है वर्तमान पॉलिटिक्स। झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शिबू सोरेन के चलते वहां की राजनीति हमेशा से अस्थिर रही है, क्योंकि वे आधुनिक पॉलिटिक्स अच्छी तरह से जानते हैं। इसलिए-हे नारद, जागिए और भटके लोगों को वो पॉलिटिक्स सिखाइए, जिससे लोगों की सोच सकारात्मक हो। वर्ना वो दिन दूर नहीं जब हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा होगा। क्योंकि, इस पॉलिटिक्स में पेड़ कट चुके होंगे, नदियां सुख चुकी होंगी, खेत फट चुके होंगे, सूरज देवता और विशाल हो चुके होंगे और हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा...।

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर लेख .. बाधाई
    आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आया हूँ आकर बहुत अच्छा लगा .
    कभी समय मिले तो http://shiva12877.blogspot.com ब्लॉग पर भी आप अपने एक नज़र डालें . धन्यवाद् .

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  2. आपकी एक अच्छी प्रस्तुति कृपया यही हौसला बनाये रखें
    बहुत सारी शुभ कामनाएं आपको !!

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