बुधवार, 19 अक्तूबर 2016

मौसम विभाग की भविष्यवाणी ‘फेल’

मौसम विभाग हर साल बारिश की भविष्‍यवाणी करता है कि लेकिन गए चार सालों से उसकी भविष्‍यवाणी पूरी तरह फेल हो रही है। इस साल जब बेहतर मौसम की भविष्‍यवाणी की गई तो न सिर्फ किसानों के चेहरे खिल उठे, बल्‍कि कई कंपनियों ने मुनाफे की गणना भी शुरू कर दी। कयास की खबरें छपने लगी कि किसे कितना फायदा होगा। देश की अर्थव्‍यवस्‍था पर इसका कितना असर पड़ेगा। लेकिन कई विशेषज्ञ ऐसे भी थे, जो मौसम विभाग की भविष्‍यवाणी को पूरी तरह से खारिज करते हुए अपने काम में मशगूल रहे। ये वो हस्‍ती थे, जो मौसम विभाग में काम करते हुए उच्‍च पदों से रिटायर हुए थे। मीडियाकर्मियों ने जब उनसे यह जानना चाहा कि उन्‍हें अपने ही विभाग की भविष्‍यवाणी पर कितना यकीन है, वे बिफर पड़े-कहां कि मौसम विभाग की अस्‍सी फीसद भविष्‍यवाणी सही नहीं होती। मौसम विभाग से जुड़ी मशीनें पुरानी पड़ चुकी हैं। यह विभाग पूरी तरह से बीमार है। विदेशों में मशीनें अपडेट हैं, यही वजह है कि वहां की भविष्‍यवाणी बिल्‍कुल सटीक होती है। भारत में इसपर कभी ध्‍यान ही नहीं दिया गया। यदि वास्‍तव में इस विभाग को ठीक करना है तो अत्‍याधुनिक मशीनें लाई जाएं। यहां के वैज्ञानिकों को प्रोत्‍साहन दिया जाए, उन्‍हें विकसित देशों में भेजा जाए, जहां वे जाकर देखें कि वहां मौसम विभाग कैसे काम करता है? यदि विभाग की एक भविष्‍यवाणी गलत होती है तो इसपर मंथन किया जाए, ताकि दुबारा समस्‍या न झेलनी पड़ी। विशेषज्ञ का बयान वास्‍तव में चौंकाने वाला और चिंतित करने वाला है। सच भी है। वास्‍तव में मौसम विभाग की भविष्‍यवाणी पर आम आदमी को भी भरोसा नहीं है। बिहार के किसान तो यहां तक कहते हैं कि मौसम विभाग यदि आज बारिश की घोषणा करे तो मान लीजिए आज तेज धूप होगी। मौसम विभाग की ओर से सटीक भविष्‍यवाणी न होने से हर साल लाखों किसानों को खामियाजा उठाना पड़ता है। क्‍योंकि, आज भी अधिकतर किसान खेती के लिए मानसून पर निर्भर हैं। विदेशों में ऐसा नहीं है, वहां के किसान वैसी फसल उगाने पर ध्‍यान दे रहे हैं जिसमें कम पानी की आवश्‍यकता हो। इसके विपरीत हम अब भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं, इसमें सुधार की कोई उम्‍मीद नहीं दिख रही है। विश्‍व के कई देश आज भारत से दोस्‍ती चाहते हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि बुनियादी चीजों को जल्‍द से जल्‍द दुरुस्‍त करे। सुलझे नेताओं को देशहित में ही काम का बीड़ा उठाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है, तभी तो मौसम विभाग आज भी दो दशक पीछे चल रहा है। केंद्र में मोदी सरकार को पूर्ण बहुमत प्राप्‍त है, ऐसे में बुनियादी समस्‍याओं को जल्‍द से जल्‍द निपटाना चाहिए। किसानों का कर्ज माफ करने से ज्‍यादा जरूरी है कि उन्‍हें आत्‍मनिर्भर बना दिया जाए। 

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